पलियाकलां। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से घर-घर जाकर आभा आईडी बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसमें सीएचसी स्तर पर सबसे बढ़िया काम बनकटी में आशा कार्यकर्ताओं ने किया है। पूरे सीएचसी में आभा आईडी बनाने में बनकटी अव्वल रहा। जबकि लालपुर ढाका सबसे फिसड्डी है। सीएचसी अधीक्षक ने शत-प्रतिशत आईडी बनाने के निर्देश अधीनस्थों को दिए हैं।
शासन के निर्देश पर प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य खाता यानी आभा आईडी बनवाई जा रही है। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं को लगाया गया है। उन्हें सर्वे के आधार पर ई-कवच पर आभा आईडी बनानी हैं। इसके लिए रोजाना ज्यादा से ज्यादा आईडी बनाने के निर्देश हैं। बात अगर पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हो तो यहां 37 सब सेंटरों की आशाओं के जरिये कार्य किया जा रहा है।
शहरी क्षेत्र के लिए 25 टीमें स्वास्थ्य विभाग ने लगाई हैं, जो सर्वे करने के साथ ही आभा आईडी बनाने का काम कर रही हैं। अभी तक करीब 70 हजार आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। सीएचसी, पीएचसी को मिलाकर यह कुल 28 प्रतिशत हैं। अभी भी 72 प्रतिशत लोगों की आभा आईडी बनाने का कार्य बाकी है।
लालपुर ढाका में धीमी गति से हो रहा आईडी बनाने का कार्य
बनकटी सब सेंटर पर 58 प्रतिशत लोगों की आभा आईडी बनाई जा चुकी है। जबकि 55 प्रतिशत के साथ गौरीफंटा दूसरे, 45 प्रतिशत के मरौंचा तीसरे, 44 प्रतिशत के साथ चंदनचौकी चौथे व 41 प्रतिशत के साथ पलिया देहात पांचवें नंबर पर है। लालपुर ढाका में मात्र साढ़े नौ प्रतिशत व खजुरिया में 10 प्रतिशत ही आईडी बनाने का कार्य हुआ है।
क्या है आभा आईडी
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में आभा आईडी लांच की है, जिसमें हर एक व्यक्ति का स्वास्थ्य खाता तैयार रहेगा। व्यक्ति के स्वास्थ्य का सारा डाटा जुड़ा होगा। आभा आईडी के जरिये अस्पताल में पर्चा बनवाना, लैब की रिपोर्ट और स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां इस आभा आईडी में उपलब्ध रहेंगी।
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आभा आईडी के लिए शहरी क्षेत्र में टीमें लगाई हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में आशाओं के जरिये आभा आईडी बनवाने का कार्य हो रहा है। एएनएम व आशाओं को साफ निर्देश दिए हैं कि वह रोजाना क्षेत्र में घर-घर जाकर सर्वे करें और आईडी बनाने का कार्य करें।
डाॅ. भरत सिंह, अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलिया