पलियाकलां। दुधवा में इस बार भी सैलानियों को विदेशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों को देखने का मौका मिलेगा। यह पक्षी तालाबों व झीलों के पास सर्दी के मौसम में डेरा डाल देते हैं और चार माह बाद अपने घर वापसी करते हैं।
दुधवा नेशनल पार्क में आने वाले सैलानियों की चाहत होती है कि वह बाघ, तेंदुआ, हिरन, हाथी, गैंडा आदि को स्वच्छंद विचरण करते देखें। वहीं शीतकाल में आने वाले सैलानियों को प्रवासी पक्षियों को भी देखने का मौका मिलता है। दुधवा के किशनपुर, बांकेताल, बैडिटल, टाइगर पूल के साथ ही झादीताल में इन विदेशी प्रवासी पक्षियों की आमद शुरू हो गई है।
यह पक्षी लगभग 15 हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर शीत ऋतु में दुधवा पार्क का रुख करते हैं। इसमें साइबेरियन पक्षी भी आते हैं, जो यहां रुकने के बाद लगभग चार माह बाद वापस अपने देशों को लौटते हैं। झीलों या तालाबों के पास घोंसले बनाकर यह बच्चों के साथ रहते हैं।
बताया जाता है कि ठंडे देशों के जलाशयों में बर्फ जमने के बाद यह पक्षी भोजन और आवास की तलाश में लंबी यात्रा तय करते हुए दुधवा के जंगलों में अपना बसेरा बनाते हैं। रंग-बिरंगे इन प्रवासी विदेशी पक्षियों की कलरव व आवाजें सैलानियों के साथ ही पक्षी प्रेमियों को खासा आकर्षित करती हैं। इन पक्षियों की आमद से पूर्व ही पार्क प्रशासन ने इनके भोजन व इनकी सुरक्षा को लेकर बंदोबस्त किए हैं।
इन देशों से आते हैं यह प्रवासी पक्षी
शीत ऋतु में रहने वाले यह प्रवासी पक्षी यूरोपीय देशों के साथ ही मध्य एशिया, चीन, तिब्बत, साइबेरिया, लद्दाख सहित अन्य शीत ऋतु वाले देशों से आकर दुधवा की शान बढ़ाते हैं। सैलानी इनको देखकर उत्साहित होते हैं और इनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की कोशिश करते हैं।
प्रवासी पक्षियों की यह प्रजातियां हैं विशेष
विदेशी मेहमानों की सूची में कलश उरेशिन विजल पक्षी, लालकृष्ण पासी, लेजर विल्सिंग डक, रूडी सेलडक, पिन रेल, काॅमन कोड, ग्रीलग गल्स, रेड क्रस्टेड पोचार्ड, गड़वाल, मेलार्ड, ग्रेट कोमार्ट सहित कई विभिन्न प्रजाति पार्क के जलाशयों व तालाबों के किनारे अपना आशियाना बनाने के लिए हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर यहां पहुंचते हैं।