फरवरी में ही मौसम एकाएक गर्म हो जाने से ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी परिंदे समय से पहले ही अपने वतन लौट गए हैं। अमूमन इन परिंदों की वापसी मार्च के पहले सप्ताह में होती है लेकिन इस बार आधी फरवरी से प्रवासी पक्षियों का लौटना शुरू हो गया था। प्रवासी पक्षियों के चले जाने से सेमरई और नगरिया झीलें सूनी हो गई है।
सर्दी शुरू होते ही जिले के तमाम जलाशय रंग बिरंगे प्रवासी परिंदों से गुलजार हो जाते हैं। दूर देशों से हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भर कर हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी यहां आते हैं इन पक्षियों के आने का सिलसिला नवंबर के मध्य से शुरू होता है। करीब तीन महीने तक यहां प्रवास और प्रजनन करने के बाद मार्च में ये परिंदे अपने वतन लौट जाते हैं। इस बार फरवरी की शुरुआत से ही गर्मी शुरू हो गई। इससे ये पक्षी समय से पहले ही अपने वतन लौट गए।
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यहां से आते हैं ये प्रवासी पक्षी
सर्दियों के मौसम में सात समुंदर पार यूरोपीय देशों के अलावा, मध्य एशिया, चीन, तिब्बत, साइबेरिया आदि देशों के अलावा लद्दाख से बड़ी संख्या में जलीय पक्षियों के झुंड तराई के जलाशयों में आते हैं।
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इन जलाशयों को बनाते हैं अपना आशियाना
खीरी जिले की सेमरई झील, नगरिया झील, मैनहन झील, रमियाबेहड़ झील, महमदाबाद, शारदा नहर का सीपेज वाला क्षेत्र, किशनपुर सेंक्चुरी के झादी ताल, मैनहन झील, शारदा बैराज, शारदा नहर और दुधवा नेशनल पार्क में सुहेली नदी और तालाबों समेत दर्जनों जलाशयों में प्रवासी परिंदे चार माह के लिए अपना आशियाना बनाते हैं। यहां उन्हें प्राकृतिक आवास और भोजन मिलता है।
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यहां आने वाले प्रमुख प्रवासी पक्षी
रेड क्रस्टेड, पोचर, छोटा लालसर, ग्रे लेग गूस, बार हेडेड गूस, कामन टील, ट्रस्टेड डक, अबलक व कुर्चिया बतख, सुर्खाब, टिमटिमा चौबहा, छोटी मुर्गाबी, सिलेटी सवन आदि।
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पक्षियों के प्राकृतिक आवास का हो रहा क्षरण
अतिक्रमण और बढ़ते कृषि क्षेत्रफल के कारण संकुचित होते जलाशय, झीलों और तालाबों में बढ़ती सिंघाड़े की खेती और खेतों में कीटनाशक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से प्राकृतिक आवास ही नहीं पक्षियों के लिए भोजन की कमी भी पडने लगी है।
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मौसम में रहे बदलाव के कारण इस बार फरवरी की शुरुआत से ही गर्मी बढ़ने लगी है। गर्मी बढ़ने से इस साल ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी परिंजदे करीब 20 से 25 दिन पहले ही अपने देशों को वापस चले गए हैं।
-नीरज कुमार, डीएफओ साउथ, लखीमपुर खीरी।