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मौसम बदलते ही अपने वतन लौटने लगे प्रवासी परिंदे

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नगरिया झील से उड़ान भरते परिंदे। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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तीन महीने गुलजार रहने के बाद सूनी हुई नगरिया झील
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हजारों पक्षियों के कई झुंड पिछले पांच-छह दिनों में भर चुके हैं उड़ान

बांकेगंज। मैलानी रेंज की नगरिया झील में हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर आए प्रवासी परिंदे यहां तीन माह का प्रवास करने के बाद अब अपने वतन लौटने लगे हैं। इस बार गर्मी देर से शुरू होने के कारण प्रवासी पक्षियों का लौटना मार्च के दूसरे सप्ताह से शुरू हुआ है। हजारों पक्षियों के कई झुंड पिछले पांच-छह दिनों में उड़ान भर चुके हैं, जो बचे हैं वे वापसी की उड़ान भरने की तैयारी में हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज और बांकेगंज कस्बा से सटी नगरिया झील में हर साल मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर तराई के जलाशयों में आते हैं। यह पक्षी मध्य नवंबर से आना शुरू होते हैं। दिसंबर और जनवरी के महीनों में जिले की नगरिया झील सेमरई, किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल, दुधवा के भादीताल, कुकरगढ़ा और मैनहन झीलों समेत जिले के सभी जलाशय रंग-बिरंगे परिंदो से गुलजार रहते हैं। इन पक्षियों की चहचहाहट से वातावरण गूंजता रहता है। दिसंबर, जनवरी और फरवरी तीन माह यहां प्रवास करने के बाद फरवरी के अंत से मार्च के मध्य तक प्रवासी परिंदे अपने वतन लौट जाते हैं।
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सर्दियों के मौसम में ठंडे देशों का तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस के नीचे पहुंच जाता है। झीलों का पानी जमकर बर्फ में तब्दील हो जाता है। ऐसे में पक्षियों के आवास और भोजन की समस्या पैदा होती है। ठंडे देशों में यह मौसम इनके प्रजनन के लिए भी अनुकूल नहीं रहता। तब यह भारत जैसे गर्म देशों आ जाते हैं। तराई क्षेत्र में बड़ी संख्या में झीलें और तालाब हैं, जो इनके प्रवास स्थल बनते हैं।
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मैलानी रेंज की नगरिया झील और किशनपुर सेंक्चुरी का झादीताल इनकी पसंदीदा जगह रही हैं। यहां इन्हें अनुकूल प्राकृतिक आवास, प्रजनन का अनुकूल वातावरण ही नहीं पर्याप्त सुरक्षा और स्थानीय लोगों का दुलार भी मिलता है। हालांकि शिकारी मौका पाकर इनका शिकार भी कर लेते हैं, लेकिन नगरिया झील के आसपास रहने वाले लोगों की सतर्कता और वन कर्मियों की पेट्रोलिंग से यहां शिकार कम हो पाता है। जिन दिनों यह विदेशी पक्षी यहां प्रवास करते हैं उन दिनों यहां पक्षी प्रेमियों और विशेषज्ञों के अलावा नेचर फोटोग्राफरों का जमावाड़ा रहता है, जो कई-कई दिन यहां रुककर पक्षियों की गतिविधियों का अध्ययन करते हैं।

नगरिया झील में आते हैं ये प्रवासी परिंदे

नगरिया झील में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन और लद्दाख से खूबसूरत रंग-बिरंगे पक्षी आते हैं। इसमें अबलक, गुर्चिया बत्तख, ब्राहमानी डक, कूट, मून, हेन, ग्रेलेग गूस बार हेडेड गूस, टस्टेड डक समेत कई प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में यहां आते हैं।

गर्मी की दस्तक के साथ ही ठंडे देशों से आने वाली प्रवासी परिंदों की वापसी शुरू हो गई है। अब तक बड़ी संख्या में प्रवासी परिंदे वापस जा चुके हैं। प्रवासी परिंदों की वापसी के साथ ही नगरिया झील के विकास का काम शुरू किया जा रहा है।- डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व,बफरजोन

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