- रविवार को जीआईसी में हुआ कार्यक्रम
- शामिल हुई दो सौ अल्पसंख्यक महिलाएं
गंगा जमुनी संस्कृति को बढ़ावा देने तथा समुदायों के बीच बढ़ती कटुता को कम करने के उद्देश्य को लेकर सतत सेवा संस्थान ने रविवार को जीआईसी में पैगाम-ए-अमन का कार्यक्रम किया। इसमें मदारिस इस्लमियां इदारा-ए-दीनयात के अध्यक्ष मौलाना सईद कासमी ने सभी से आपस में भाईचारे के साथ रहकर एक दूसरे के सुख-दुख में सहयोग करने के लिए प्रेरित किया।
पैगाम-ए-अमन कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समुदाय की करीब दो सौ महिलाएं शामिल हुई। इनको संबोधित करते हुए मौलाना सईद कासमी ने कहा कि कोई भी इंसान आतंकवादी नहीं हो सकता, यदि है तो वह जानवर से भी बदतर है। सच्चा मुसलमान वही है, जो अपने आसपास रह रहे लोगों की मदद करें। इन्होंने कहा कि इस्लाम कहता है कि इंसान का सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है और जो आतंकवाद से जुड़े हैं, वह मुसलमान नहीं हो सकते है। मौलाना सईद कासिम ने कहा कि हर मनुष्य का फर्ज है कि वह सभी धर्मों का सम्मान करे। मौलाना नोमान ने कहा कि बगैर शिक्षा के इंसान अल्लाह और भगवान को नहीं पहचान सकता है, इसलिए शिक्षा जरूरी है। इस दौरान संस्थान के सचिव आशुतोष त्रिवेदी, सतेंद्र बहादुर सिंह, काजी जमीर, अशोक सक्सेना सहित कई लोग मौजूद रहे।