सरकार ने मेडिकल स्टोर की लाइसेंस फीस को तीन से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने का फैसला किया है। इससे दवा कारोबारियों में हड़कंप है। सबसे ज्यादा छोटे दुकानदार इस फैसले से प्रभावित होंगे। लिहाजा सरकार के इस फैसले के विरोध में केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने भाजपा सांसद अजय मिश्र टेनी को ज्ञापन सौंपा, जिसमें फीस बढ़ोतरी के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। साथ ही केमिस्टों को अनुभव के आधार पर फार्मेसिस्ट की अर्हता प्रदान करने की मांग भी शामिल है।
औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम 1945 के तहत लाइसेंस निर्माण तथा नवीनीकरण में फीस बढ़ोतरी के लिए केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने प्रस्ताव का गजट जारी कराया है, जिसमें मेडिकल स्टोर के लाइसेंस एवं नवीनीकरण का शुल्क तीन से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा अन्य मदों के शुल्क में भी 10 गुना तक वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है।
29 दिसंबर 2015 को जारी गजट में 45 दिन का समय आपत्तियों के लिए दिया गया है। सरकार के इस कदम की भनक लगते ही दवा कारोबारियों में खलबली मच गई है। खासकर ग्रामीण इलाकों के छोटे दवा कारोबारियों के लिए ये फैसला बेरहम साबित हो सकता है। संगठन के सचिव रवि गुप्ता ने सांसद को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि लाइसेंस फीस में 10 गुना वृद्धि का पुरजोर विरोध किया जाएगा। दवा व्यवसाय में बढ़ती प्रतिस्पर्धा तथा खर्चों का हवाला देते हुए फीस बढ़ोतरी केे प्रस्ताव से केमिस्टों को गहरा आघात लगेगा।
खासकर ग्रामीण क्षेत्र के छोटे केमिस्टों के लिए सेवा दे पाना संभव नहीं होगा, जिससे तमाम लोगों के बेरोजगार होने की संभावना बन जाएगी। संगठन ने औषधि और प्रसाधन सामग्री नियम 1945 की धारा 65.2 में पुन: संशोधन कर केमिस्टों को पूर्व की भांति अनुभव के आधार पर फार्मेसिस्ट की अर्हता प्रदान करने की मांग सरकार से की है। प्रतिनिधिमंडल में कार्यवाहक अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल, प्रकाश चंद्र सहगल आदि शामिल थे।