किशनपुर सेंक्च्युरी के मैलानी रेंज की मड़हा बीट में हरे-भरे और घने जंगलों के बीच रमणीक स्थल पर भोले शंकर का छोटा सा मंदिर है। मंदिर भले ही छोटा हो, लेकिन लोगों की श्रद्धा बहुत अधिक है। जेठ माह में तो यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। चिलचिलाती धूप और तपती गर्मी में लंबी दूरी तय कर लोग यहां पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
जेठ माह की शुरुआत होते ही घने जंगलों में विराजमान मड़हाबाबा मंदिर पर दर्शनार्थियों के पहुंचने का सिलसिला वर्षा ऋतु शुरू होने के बाद ही थमता है। इलाकाई भक्तों के अलावा पड़ोसी जिलों पीलीभीत, शाहजहांपुर, बरेली, लखनऊ आदि के श्रद्धालु भी तपती गर्मी में निजी वाहनों से प्रति दिन सैकड़ाें की संख्या में यहां पहुंचते हैं।
यहां भगवान शिव के जलाभिषेक के अलावा सत्यनारायण की कथा, मुंडन और भंडारा भी होता है। यहां पूजा कब शुरू हुई, कब मंदिर बना किसी को कुछ पता नहीं लेकिन ऐसी मान्यता है कि मड़हा बाबा के दर्शनों से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भक्तों को इस देवस्थान पर अद्भुत शांति मिलती है।
श्रद्धा के चलते लोग नहीं करते शिकार
मड़हा वन क्षेत्र में हिंसक वन्यजीवों के अलावा सैकड़ों की संख्या में चीतल, पाढ़ा, हिरन आदि हैं। बावजूद इसके श्रद्धा के चलते लोग यहां शिकार नहीं करते। लोगों का मानना है कि देवस्थान क्षेत्र में ऐसा करने पर विपत्तियों का सामना करना पड़ता है।