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पड़ोसी देश नेपाल के भक्तों में प्रसिद्ध है माता मंजेश्वरी देवी मंदिर

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पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। कस्बा मझगईं में स्थित माता मंजेश्वरी देवी मंदिर जिले में ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश नेपाल में भी आस्था का केंद्र बिंदु है। भक्तों की मानें तो यहां मांगी गईं मन्नतें पूरी होती हैं। साधारण इंसान से भगवान बनीं माता मंजेश्वरी का चार मंजिला मंदिर ऐतिहासिक है। नवरात्र के समय यहां हवन पूजन रोजाना होता है। जिसमें दूर-दराज से लोग आकर पूजा अर्चना करते हैं। प्रत्येक वर्ष माता मंजेश्वरी देवी का जन्मोत्सव के साथ ही मौनी अमावस्या, नवरात्रि व उनकी पुण्यतिथि पर भंडारे व धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन श्रद्धालुओं के सहयोग से किया जाता है। जिसमें भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
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इंसान से भगवान कैसे बनीं माता मंजेश्वरी देवी
मझगईं के क्षत्रिय परिवार में 12 जून 1972 को मंजेश्वरी देवी का जन्म हुआ था। उनके पिता स्व. मदारी सिंह व माता स्व. पवन कुमारी ने उनका नाम मंजू रखा। स्कूल में जब नाम लिखवाया गया तो वहां मंजेश्वरी देवी लिखा गया। 12 वर्ष की उम्र से ही उन्होंने अन्न जल त्याग दिया। वह अकेले आसन लगाकर कमरे में बैठी रहीं। यह बात जब गांव वालों को पता लगी तो उनमें श्रद्धा बढ़ गई वहां सबने मिलकर एक मंदिर का निर्माण कराकर उनसे मंदिर में आने का आग्रह किया। जिस पर वह मंदिर में आकर तो बैठ गईं लेकिन पूजा अर्चना कराने से उन्होंने मना कर दिया। बताया जाता है कि नवरात्रि की अष्टमी पर एक महिला पूजा पाठ करके प्रसाद चढ़ाने आई, जिससे नाराज होकर माता ने उस महिला का गला काट दिया। जिसके बाद परिजनों ने उन्हें कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगा दिया। पुलिस पहुंची और उसने ताला खोलने का भरसक प्रयास किया, लेकिन ताला नहीं खुल पाया। जब सभी अपने जूते-चप्पल आदि बाहर उतारकर दोबारा कमरे के पास आए तो ताला खुला और महिला का गला भी कटा नहीं मिला। कलयुग में यह चमत्कार देखकर सभी दंग रह गए। धीरे-धीरे मान्यता जिलों के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल में बढ़ी और भक्तों की भीड़ लगने लगी।
अंत समय में पत्थर का हो गया था माता का शरीर
माता मंजेश्वरी देवी ने जब अपने शरीर को त्यागा तो वह धीरे-धीरे पत्थर का हो चुका था। 26 जुलाई 1996 को उन्होंने शरीर त्याग दिया और ब्रम्हालीन हो गईं। जिस स्थान पर उन्होंने शरीर त्यागा वहां एक भव्य चार मंजिला मंदिर बनकर तैयार हो गया है।
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चुनरी बांधकर भक्त मांगते हैं मंदिर में मन्नत
माता मंजेश्वरी देवी के हाथ से लगाए गए पेड़ में चुनरी बांधकर जो लोग मन्नत मांगते हैं व अपने बिगड़े कामों को लेकर माता की शरण में जाते हैं। उनकी मन्नत पूरी होती है।
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