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शहर में कई हैं ‘जाम प्वाइंट’

Sun, 28 Jun 2015 06:07 PM IST
लखीमपुर खीरी
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यातायात किसी भी शहर की जीवनधारा होती है। धड़कन में ठहराव का मतलब है गतिमान जीवन में रुकावट पड़ना।
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शहर के उत्तर, दक्षिण और पूरब से पश्चिम दिशा में लंबाई को क्रॉस करने के लिए मेन रोड है। इन्हीं रास्तों को अगर शहर की मुख्य धमनियां और शिराएं मान लिया जाए तो यह कहने में संकोच नहीं होना चाहिए कि शहर की मुख्य नाड़ियों का संचार प्रवाह ठीक नहीं है, क्योंकि वन वे व्यवस्था के चलते वाहनों को इन्हीं लिंक मार्गों का सहारा लेना पड़ता है। चूंकि शहर में दोपहिया से लेकर चौपहिया तक वाहनों की तादाद में खासा इजाफा हुआ, इसलिए अक्सर इन लिंक रोड पर जाम लगा रहता है। यही वजह है शहर में एक नहीं कई जाम प्वाइंट बन गए हैं। सिविक सेंस की कमी के अलावा मुख्य वजह ट्रैफिक  नियमों का पालन नहीं कराया जाना भी है। ऊपर से ट्रैफिक व्यवस्था को कंट्रोल करने वाली यातायात पुलिस के स्टाफ का अभाव है।
हमदर्द चौराहा
कचहरी रोड, मेन रोड मार्केट, मिश्राना चौराहा मार्ग, थरवरनगंज होकर अस्पताल रोड को जाने वाले हमदर्द चौराहे से इस लिंक मार्ग पर दिनभर आवागमन रहता है क्योंकि आगे मेनरोड कोतवाली की तरफ वाहन नहीं जाते, लिहाजा चौैपहिया वाहन के साथ रिक्शे यहीं से जाते हैं। नतीजतन दिन में यहां कई बार जाम लगता है और यातायात घिसट-घिसट कर चलता है।  
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मोहल्ला नई बस्ती
मोहल्ला नईबस्ती में बस स्टेशन रोड, वाजपेयी कॉलोनी, अस्पताल रोड और थरवरनगंज के लिंक मार्ग पर दिनभर वाहनों का आवागमन रहता है पर सुबह नौ से दस बजे यहां भारी भीड़ रहती है।
संकटादेवी
इसी तरह बड़ा चौराहा से संकटादेवी मार्ग और रेलवे स्टेशन से रानीगंज होकर गुड़मंडी तथा संकटादेवी लिंक मार्ग और मेन रोड पर सीओ दफ्तर तक पैदल चलने वाले दिनभर जाम से जूझते हैं।
एक भी पार्किंग स्थल न होना भी है जाम की वजह
यातायात पुलिस उपनिरीक्षक दिनेश यादव के अनुसार शहर में किसी भी अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल अथवा शापिंग काम्पलेक्स में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। यही वजह है कि यहां आने वाले अपने दुपहिया और चौपहिया वाहन सड़कों पर खड़ा कर देते हैं, जो जाम का कारण बनते हैं।
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काफी कम है ट्रैफिक पुलिस
वाहनों और आबादी के लिहाज से ट्रैफिक पुलिस काफी कम है। यहां एक टीएसआई का पद है, जबकि दो हेड कांस्टेबल और 10 सिपाही के पद स्वीकृत हैं, इसके विपरीत सिर्फ सात सिपाहियों की ही नियुक्ति है। यह स्टाफ करीब 15 साल पहले स्वीकृत हुआ था। आबादी और वाहन तबसे 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ गए, लेकिन स्टाफ उतना ही है।

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