लखीमपुर/ओयल। मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल में डिजिटल वाटर की कमी के कारण शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण पैथोलॉजी जांचें प्रभावित हो गईं। टीएसएच, यूरिक एसिड, एलएफटी, केएफटी, बी12, डी3 और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांचें न होने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। दूरदराज से आए मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें 200 से 250 मरीजों को विभिन्न जांचें कराने की सलाह दी जाती है। शुक्रवार को पैथोलॉजी में जांच के लिए पहुंचे मरीजों को रजिस्ट्रेशन काउंटर पर डिजिटल वाटर (केमिकल) की कमी बताकर वापस कर दिया गया।
मरीजों का कहना है कि उन्हें बताया गया कि संबंधित जांचें शुक्रवार को नहीं हो पाएंगी। सोमवार या मंगलवार को आना होगा। हालांकि, कुछ मरीजों के ब्लड सैंपल लेकर रिपोर्ट तीन से चार दिन बाद देने की बात कही गई।
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डॉक्टर ने टी3, टी4 और टीएसएच जांच लिखी थीं। टी3 और टी4 जांच के लिए सैंपल ले लिया गया, लेकिन टीएसएच जांच तीन-चार दिन बाद कराने के लिए कहा गया।
-अमित त्रिवेदी, मरीज, जाम मुबारकपुर
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एड़ियों में काफी दर्द है। डॉक्टर ने दवा के साथ जांचें लिखी हैं। लैब में बताया गया कि जांचें तीन-चार दिन बाद हो पाएंगी। कारण पूछने पर ब्लड सैंपल ले लिया गया।
- राजेश कुमार, मरीज, रुद्रपुर कला
कई निधियों के बावजूद जरूरी सामग्री का संकट
जिला अस्पताल में पिछले कुछ समय से मरीजों को लगातार असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। बीते दिनों एक्स-रे प्लेट, शुगर स्ट्रिप और अब लैब में डिजिटल वाटर की कमी की समस्या सामने आ चुकी है। दूरदराज क्षेत्रों से सस्ते इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। अस्पताल में रोगी कल्याण निधि, आयुष्मान भारत सहित कई ऐसी निधियां हैं, जिनका उपयोग डिजिटल वाटर जैसी आवश्यक सामग्री की खरीद में किया जा सकता है।
पैथोलॉजी में कुछ जांचें प्रभावित हैं। हालांकि अन्य जरूरी जांचें हो रही हैं। डिजिटल वाटर की खरीद के लिए मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य से बात की जा चुकी है। सोमवार तक इसकी आपूर्ति हो जाएगी। रोगी कल्याण सहित अन्य निधियों से अस्पताल में एसी और दरवाजों का कार्य कराया गया है।
-डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी के सामने लगी लाइन। संवाद
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी के सामने लगी लाइन। संवाद