पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के द्वार औपचारिक रूप से सोमवार को सैलानियों के लिए बंद कर दिए गए। हालांकि कोरोना वायरस की महामारी को लेकर 18 मार्च से ही दुधवा बंद है लेकिन हर साल मानसून सत्र के पहले 15 जून को पार्क के पर्यटन सत्र का समापन किया जाता है और 15 नवंबर से फिर से पार्क के द्वार सैलानियों के लिए खोले जाते हैं। इस बार का पूरा पर्यटन सत्र बरसात व कोरोना के चक्कर में बंदी में ही गुजर गया। जिससे बाहर से आने वाले सैलानियों की तादाद भी न के बराबर रही।
बता दें कि विश्वविख्यात दुधवा नेशनल पार्क के द्वार सैलानियों के लिए 15 जून से बंद किए जाते हैं। यहां प्रतिवर्ष सैलानियों की भीड़ का तांता दुधवा के अलौकिक वातावरण व यहां स्वच्छंद विचरण करते हुए वन्यजीवों का दीदार करते हैं। इस बार के पर्यटन सत्र में अधिकांश दुधवा नेशनल पार्क बंद रहा। कई बार बेमौसम बारिश की वजह से दुधवा के द्वार बंद रहे तो मार्च माह में कोरोना वायरस की महामारी ने दस्तक दे दी। इसके बाद 18 मार्च से एक बार फिर से दुधवा को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया। जिससे यहां हर बार की तुलना में कुछ ही माह दुधवा के द्वार खुलने से सैलानियों की संख्या कम रही। 15 नवंबर 2019 से शुरू हुए पर्यटन सत्र के बंद होने तक लगभग दस हजार से भी कम सैलानियों ने पार्क का भ्रमण किया। हालांकि शुरूआती दौर में सैलानियों की संख्या बढ़ी हुई थी लेकिन बेमौसम होने वाली बरसात से पार्क के द्वारा बीच-बीच में बंद होते रहे। इसके बाद कोरोना महामारी और एंथ्रेक्स जैसी बीमारी फैलने के डर से 18 मार्च को पूरी तरीके से पार्क को बंद कर दिया गया। जिसके बाद 15 जून को औपचारिकता निभाते हुए मानसून सत्र के आगाज से पूर्व दुधवा नेशनल पार्क को बंद कर दिया गया।
पार्क तो सैलानियों के लिए मार्च में बंद हो गया था लेकिन केवल औपचारिक रूप से पार्क को 15 जून में बंद कर दिया गया है। अब मानसून गश्त पेट्रोलिंग की जाएगी ताकि बारिश के मौसम में शिकार और कटान की घटनाओं को रोका जा सके। - मनोज कुमार सोनकर , डिप्टी डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क