लखीमपुर खीरी। लॉकडाउन के दौरान एक तरफ लोग घरों में हैं और ज्यादातर उद्योग-धंधे बंद होने से लाखों कामगार बेरोजगार हो गए हैं। ऐसे में 20 अप्रैल से सरकार के मनरेगा से काम कराने की छूट देने के बाद जॉबकार्डधारकों और बाहर से आए कामगारों के जॉबकार्ड बनाकर उन्हें काम दिया जा रहा है। जिला प्रशासन का भी पूरा जोर मनरेगा से ही गांव में मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने पर है। 50 हजार से अधिक मजदूरों को प्रतिदिन काम देने का दावा विभागीय अधिकारी कर रहे हैं, करीब एक करोड़ रुपये प्रतिदिन मजदूरी भुगतान किया जा रहा है, लेकिन अब भी काफी मजदूर हैं, जिनको अब तक रोजगार नहीं मिल पाया है।
कोरोना महामारी से बचाव के लिए केंद्र सरकार ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लागू करने के बाद अगले दिन से लॉकडाउन कर रखा है। इस बीच दूसरे राज्यों में काम करने गए करीब 20 हजार से अधिक कामगार जनपद में लौटे। इससे लोगों को रोजगार देने का बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने थी। लॉकडाउन का करीब एक माह बीतने पर सरकार ने 20 अप्रैल से मजदूरों को गांव में ही रोजगार देने के लिए मानरेगा योजना से काम को हरी झंडी दे दी। इसके बाद गांवों में मनरेगा से चकमार्गों के निर्माण और तालाबों की खुदाई का काम शुरू कराया गया है। गुरुवार को मनरेगा से 58445 मजदूरों को काम देने का मस्टररोल जारी किया गया, जिससे करीब 50 हजार से अधिक मजदूरों को काम मिलने का अनुमान है। उपायुक्त मनरेगा राजनाथ प्रसाद भगत ने बताया कि बाहर से आए कामगारों जिन्होंने मनरेगा में काम करने की इच्छा जताई, उन्हें काम देने के लिए करीब दो हजार नए जॉबकार्ड जारी किए गए हैं।
10 फीसदी ग्राम पंचायतों के मजदूरों को नहीं मिला काम
जनपद में कुल 1167 ग्राम पंचायतें हैैं, जिनमें से करीब 10 फीसदी ग्राम पंचायतें ऐसी हैैं जहां अब तक मनरेगा से काम शुरू नहीं हो सका है। लिहाजा इन गांवों के मजदूरों को अभी काम मिलने का इंतजार है। नकहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत अंबरसोत की प्रधान शालिनी वर्मा ने बताया कि हमारे गांव में मनरेगा से काम शुरू नहीं हो सका है, जबकि अधिकारियों से जल्द काम शुरू कराने के लिए कई बार कहा गया।
डीएम ने 49 औद्योगिक इकाइयों को संचालन की दी अनुमति
शासन से मार्गदर्शन मिलने के बाद डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने ग्रामीण क्षेत्र की 40 इकाइयों एवं औद्योगिक आस्थान/औद्योगिक क्षेत्र की नौ इकाइयों को लॉकडाउन अवधि में शर्तो के साथ ही संचालन की अनुमति दी है।
उपायुक्त उद्योग संजय सिंह ने बताया कि जिले में 33 इकाई लकड़ी आधारित आरा मशीन, वीनियर, प्लाईवुड, नान वोवेन बैग व मास्क, दो पैकेजिंग मेटेरियल, एक आक्सीजन प्लांट, तीन बेकरी एवं नमकीन, तीन डिटर्जेंट पाउडर, चार इंटरलाकिंग टाइल्स, एक आयुर्वेदिक तेल, एक क्रशर, कोल्हू एवं उनके पार्ट निर्माण की इकाई को अनुमति प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा आवश्यक सेवाओं से संबंधित खांडसारी इकाइयां, राइस मिल, फ्लोर मिल, सैनिटाइजर, चीनी मिल डिस्टलरी, ईंट भठ्ठे आवश्यक सेवाओं एवं विशेष श्रेणी की इकाइयां पहले की तरह संचालित रहेंगी।
जनपद की 90 फीसदी ग्राम पंचायतों में मनरेगा से काम शुरू कराए जा चुके हैं, जिससे 58 हजार से अधिक मजदूरों के मस्टररोल जारी हुए हैं। शेष 10 फीसदी ग्राम पंचायतों में जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। बाहर से आए कामगारों को भी मनरेगा से काम दिया जा रहा है, जिसके लिए अब तक दो हजार जॉबकार्ड बनाए गए हैं।
-राजनाथ प्रसाद भगत, उपायुक्त, मनरेगा