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Lakhimpur Kheri News: बाघों के लिए कॉरिडोर बना मंझरा पूरब और खैरटिया, एक माह में तीन मौतें

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लखीमपुर खीरी। तिकुनिया क्षेत्र के मंझरा पूरब और खैरटिया जंगल बाघ हमले के लिहाज से डेंजर जोन बन चुका है। एक माह के अंदर बाघ के हमले में तीन लोगों की जान जा चुकी है और एक नेपाली नागरिक समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इलाके में दहशत इतनी ज्यादा है कि लोगों ने खेतों पर जाना तो दूर, रास्तों पर निकलना तक बंद कर दिया है। बाघ के लगातार हमलों से इसके आदमखोर होने की आशंका बढ़ गई है। इसे लेकर ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि दुधवा नेशनल पार्क और कतर्नियाघाट जंगल के बीच मंझरा पूरब और खैरटिया का इलाका है। दोनों ओर जंगल के बीच आबादी और खेत हैं। यह क्षेत्र दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आता है। असल में यह इलाका वन्यजीवों का कॉरिडोर है। इसी कॉरिडोर के जरिए बाघ दुधवा नेशनल पार्क और कर्तनिया घाट जंगल के बीच आवागमन करते हैं। बीच में गन्ने के खेत मिलने से बाघ अक्सर उनमें प्रवास भी करते हैं। इस क्षेत्र में जो रास्ते हैं, उनके किनारे घनी झाड़ियां हैं, जो बाघों के लिए सुरक्षित आवास मुहैया कराते हैं।
इंसानों की बस्ती के पास खेतों को बाघ अपना ही आशियाना मानते हैं। इसके चलते मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं इस क्षेत्र के लिए आम हो गई हैं। ऐसे में सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
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जून 2022 में बाघिन ने महिला समेत तीन लोगों को मार डाला था
पिछले साल माह जून 2022 में सक्रिय एक बाघिन ने 17 जून 2022 को मोहनदास नामक एक व्यक्ति को अपना निवाला बनाया था। इसके बाद दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बाघिन को पकड़ने का अभियान शुरू किया। इसी अभियान के दौरान ही बाघिन ने 23 जून को एक किशोर और 27 जून को एक महिला को मार डाला। बाघिन को पकड़ने के लिए पांच पिंजड़े लगाए गए थे। 28 जून को पिजड़े में एक बाघ कैद हुआ लेकिन जांच में पता चला कि पकड़ा गया बाघ निर्दोष है, हमला कोई दूसरा बाघ कर रहा है। इसी बीच 29 जून को एक बाघिन पिंजड़े में कैद हुई। जब इसकी जांच की गई तो पाया गया कि उसके बांई ओर के दोनों कैनाइन आंशिक रूप से टूटे और घिसे हैं। नौ साल उम्र की इस बाघिन को असल हमलावर मानकर इसे लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया।

नौ महीने शांति रहने के बाद फिर लौटी दहशत
बाघिन के पकड़ जाने के नौ माह बाद तक छिटपुट बाघ के हमलों को छोड़कर कोई बड़ी घटना नहीं हुई लेकिन मार्च माह से फिर एक बार दहशत लौट आई है। रविवार सुबह मोटरसाइकिल से गजियापुर जा रहे सहेनखेड़ा गांव निवासी 18 वर्षीय युवक आकाश दिवाकर को बाघ ने इसी इलाके में अपना निवाला बना लिया है। एक माह के अंदर बाघ हमले की छह घटनाएं होने के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन सक्रिय हुआ है। अब प्रभावित इलाके में बाघ की लोकेशन पता लगाने के लिए कैमरे और पकड़ने के लिए पिंजड़े लगाने की कवायद शुरू की है। बाघ की तलाश में वनकर्मियों ने खेतों और जंगल की कांबिग भी शुरू की है।

एक माह के अंदर बाघ हमले में तीन मौतें, तीन घायल
खैरटिया मंझरा पूरब जंगल के आसपास बाघ एक माह के अंदर तीन लोगों को मौत के घाट उतार चुके हैं, जबकि तीन लोग बाघ हमले में घायल हुए हैं। मंझरापूरब जंगल के बाघ ने बीते 27 मार्च को खैरटिया निवासी किसान कश्मीर सिंह को खेत में घायल किया। 31 मार्च को बाबापुरवा निवासी किसान प्रीतम सिंह को खेत की रखवाली के दौरान निवाला बनाया। आठ अप्रैल को नेपाल निवासी पवन को घायल किया। 13 अप्रैल को मंझरापूरब गाव के किसान कुलवंत सिंह को गन्ने खेत में मजदूरों के साथ गन्ना छिलाई के दौरान गंभीर घायल किया। 18 अप्रैल को खैरेटिया नया पिंड गांव निवासी हरमेश सिंह गंभीर घायल किया, जिसकी जिला अस्पताल ले जाते समय मौत हो गयी। 23 अप्रैल को बाघ ने मोटर साइकिल से खींचकर सहनखेड़ा गांव निवासी 18 वर्षीय आकाश दिवाकर को मार डाला। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ उसे खा नहीं सका।

बाघ की लोकेशन पता लगाने के लिए प्रभावित क्षेत्र में कई जोड़ी कैमरे लगाए जा रहे हैं। बाघ पकड़ने के लिए पिंजड़े भी लगाए जाएंगे। वन विभाग की कई टीमें बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी कर रही हैं। बफर जोन के उपनिदेशक और कतर्नियाघाट के डीएफओ के नेतृत्व में बाघ को पकड़ने का अभियान शुरू किया जा रहा है।
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- बी. प्रभाकर, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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