लखीमपुर खीरी। फसलों का उत्पादन बढ़ने से मंडियों में आवक बढ़ी है, लेकिन राजापुर मंडी में उल्टी बयार चल रही है। मंडी में अनाज की आवक बढ़ने के बावजूद मंडी शुल्क घट गया है। पिछले दो वर्षों के दौरान मंडी 15 प्रतिशत घाटे में रही। तीन वर्षों में एक प्रतिशत माइनस में रही है। इस वर्ष 23.13 करोड़ रुपये मंडी शुल्क वसूली का लक्ष्य पूरा करने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैैं। लिहाजा लक्ष्य को कम कराने के लिए मंडी सचिव ने डीएम के माध्यम से मंडी परिषद के आला अफसरों को पत्र भेजकर लक्ष्य कम करने की मांग की है। साथ ही पिछले तीन वर्षों के दौरान मंडी शुल्क में आई कमी के बारे में भी आंकड़े प्रस्तुत किए हैैं।
वर्ष 2019-20 में शासन ने 23.13 करोड़ रुपये मंडी शुल्क वसूली का लक्ष्य दिया था, जिसे पूरा करने में अधिकारियों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। 31 जनवरी 2020 तक मात्र 14.09 करोड़ रुपये मंडी शुल्क जमा हो पाया है। अब दो महीने में 9.04 करोड़ की वसूली करनी शेष है, जबकि इस दौरान कोई नई फसल की आवक नहीं होनी है। पिछले कुछ सालों में मंडी शुल्क में कमी आने के पीछे मंडी शुल्क में चोरी की कहानी सामने आई है, जिसमें विभाग के ही कुछ कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि किसानों के नाम काटी जाने वाली सिक्स आर पर्ची में बाजार मूल्य को कम करके दर्ज किया जाता है, जिससे मंडी शुल्क कम करके चूना लगाया जा रहा है। पिछले वर्ष भाजपा के एक विधायक ने भी मंडी शुल्क में चोरी का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। वर्ष 2018-19 में 14.29 करोड़ रुपये मंडी शुल्क की वसूली हुई थी, जबकि वर्ष 2017-18 में 16.76 करोड़ रुपये मंडी शुल्क वसूला गया था। इन दो वर्षों में 2.47 करोड़ रुपये मंडी शुल्क घटा, जो करीब 15 प्रतिशत माइनस में है।
ऐसे लगाया जा रहा मंडी शुल्क को चूना
मंडी शुल्क में कमी आने के पीछे विभाग के लोगों की ही जिम्मेदार माना जा रहा है। इस वर्ष धान की अच्छी आवक हुई, लेकिन राइस मिलर्स द्वारा खरीदे गए धान की सूचना मंडी को उपलब्ध नहीं कराई गई। मंडी निरीक्षकों ने भी राइस मिलर्स से साठगांठ करके मामला बाहर ही निपटा दिया, जबकि मंडी सचिव राइस मिलर्स से धान की सूचना लेने के लिए नोटिस जारी करते रहे। यह खेल कई सालों से चल रहा है इसी तरह खमरिया और धौरहरा क्षेत्र में केला की अच्छी पैदावार हो रही है, जहां से प्रदेश में और दूसरे प्रदेशों में केले की आपूर्ति हो रही है। सूत्र बताते हैं कि सेक्टर प्रभारी ने सिक्स आर और गेट पास काटने की जिम्मेदारी वहीं के केला उत्पादकों को दे रखी है, जो 2000 रुपये बाजार मूल्य वाले केले का रेट सिक्स आर पर एक हजार से 1200 रुपये तक दर्शाया है। इसकी जांच कराने पर मामला खुलकर सामने आ सकता है, क्योंकि हैंडराइटिंग के मिलान से सच सामने आ जाएगा। इसी तरह गुड़ की अच्छी आवक है, जिसकी सिक्स आर में बाजार मूल्य से कम रेट दर्शाकर मंडी शुल्क की चोरी की जा रही है।
इस वर्ष 60 प्रतिशत वृद्धि करके लक्ष्य दिया गया है, जिसे कम करने के लिए डीएम के माध्यम से उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। इससे पहले मंडी शुल्क वसूली में घाटे में चली आ रही है। हमने जुलाई से मंडी का चार्ज संभाला है, तब से मंडी शुल्क में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
-रामबाबू शर्मा, मंडी सचिव