प्रोजेक्ट टाइगर योजना के तहत डब्लूडब्लूएफ के सहयोग से दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी और भीरा रेंजाें की 15 बीटों में 30 टाइगर वॉचरों की तैनाती की गई है। यह वॉचर जंगल और जंगल से सटे इलाकों में बाघ, तेंदुआ, गुलदार और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इसके लिए टाइगर वॉचरों को बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया है।
सर्दियों के मौसम में अक्सर बाघ और अन्य वन्यजीव जंगल से निकलकर आबादी के निकट तक आनआ जाते हैं।
इनकी पहचान न होने से ग्रामीणों में तरह-तरह की भ्रांतियां फैलती हैं। यह वॉचर जंगल से निकले जानवरों के पगमार्क देखकर ग्रामीणों को उनकी पहचान बताकर उनकी भ्रंातियाें को दूर करेंगे। साथ ही उन्हें बताएंगे कि जंगल से निकला कौन सा जानवर उनके आसपास मौजूद है।
डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि मैलानी और भीरा रेंज में रास्ता भटक कर जंगल से बाहर निकले बाघ, गुलदार आदि वन्यजीवों की पहचान के लिए 30 टाइगर वॉचरों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें उन्हें वन्यजीवों के पगमार्ग सहित अन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
टाइगर वॉचरों के प्रशिक्षण के दौरान डीएफओ साउथ नीरज कुमार, प्रभारी भीरा रेंज सविता अग्रवाल (आईएफएस) डब्लूडब्लूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन, डॉ. कमलेश कुमार, तराई आर्कलैंड स्कैप अधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह सहित प्रशिक्षु टाइगर वॉचर और रेंज कर्मी मौजूद रहे।