बरामदे में दत्ता साहब का कक्ष आज भी मौजूद
दत्ता कोठी स्वतंत्रता आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र रही। 12 नवंबर, 1929 को महात्मा गांधी कस्तूरबा गांधी के साथ इस कोठी में आए थे। यहां उन्होंने सत्याग्रह और हरिजन उत्थान के लिए जनसभा आयोजित की थी। बाद में महात्मा गांधी ने दुखहरण नाथ मंदिर में बैठक कर चंदा भी एकत्र किया था। यहां डॉ. राजेंद्र प्रसाद, आचार्य कृपलानी, शौकत अली, मोहम्मद अली, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, लाला लाजपत राय, लाल बहादुर शास्त्री, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, मीरा बेन, डॉ.सम्पूर्णानंद, एमएलसी भगवान सिंह, सेठ दामोदर दास और रानी विद्यावती जैसे समेत तमाम स्वतंत्रता सेनानियों ने भी इस कोठी में बैठकें कर आजादी की रणनीतियों पर चर्चा की।
कोठी के बरामदे में दत्ता साहब का कक्ष आज भी मौजूद है, जहां स्वतंत्रता सेनानियों के नाम का शिलापट लगा हुआ है। यह कोठी आज भी स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली यादों को संजोए हुए है।