धौरहरा। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग 12 घंटे से अधिक समय तक प्रभावी रहेगा, जिससे इस पर्व का महत्व और बढ़ गया है।
ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार, प्रातः 7:00 से सायं 7:48 बजे तक यह शुभ योग रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को अत्यंत मंगलकारी और फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस योग में किए गए जप, तप, दान-पुण्य, रुद्राभिषेक और पार्थिव शिव पूजन से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों का निवारण होता है।
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की अष्टयाम पूजा की जाती है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर रात्रि में चार प्रहर की पूजा करते हैं। मंदिरों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा और गंगाजल अर्पित करने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
भागवत कथा व्यास पंडित अर्पित मिश्र अंकित ने बताया कि महाशिवरात्रि पर शिव-शक्ति का संयुक्त पूजन विशेष फलदायी होता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए रुद्राभिषेक से समस्त कष्ट दूर होते हैं और इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
श्रीलीलानाथ और नारायणेश्वर में दिन भर होगा अभिषेक
कफारा स्थित श्रीलीलानाथ मंदिर तथा धौरहरा कस्बे के नारायणेश्वर महादेव और नागेश्वर नाथ मंदिर में दिन भर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का क्रम चलेगा। मंदिर समितियों के अनुसार प्रातः मंगला आरती के साथ पूजन प्रारंभ होगा, जो देर रात तक जारी रहेगा।