मैगलगंज का भारतीय इंटर कॉलेज । संवाद
मैगलगंज। वर्तमान दौर में जहां विज्ञान की शिक्षा को आधुनिक जीवन और कॅरिअर का आधार माना जाता है। वहीं, मैगलगंज क्षेत्र के बच्चों को मजबूरन कला वर्ग से पढ़ाई करनी पड़ रही है, क्योंकि कस्बे के एकमात्र प्रशासकीय सहायता प्राप्त भारतीय इंटर कॉलेज में विज्ञान वर्ग की पढ़ाई नहीं होती है। यहां इंटरमीडिएट स्तर पर केवल कला वर्ग ही है। ऐसे में अभिभावकों को महंगी फीस देकर निजी कॉलेजों का रुख करना पड़ता है।
भारतीय इंटर कॉलेज के प्रबंधक अनित्य अवस्थी ने बताया कि वर्ष 2007 में इंटरमीडिएट में कला वर्ग की मान्यता मिली थी। विज्ञान वर्ग के लिए प्रस्ताव तैयार कर फाइल भेजी भी गई थी, लेकिन अधिक खर्च आने के कारण प्रक्रिया अधर में अटक गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इंटरमीडिएट के छात्रों से मात्र 300 रुपये मासिक शुल्क लिया जाता है, जिससे कॉलेज का बुनियादी खर्च ही मुश्किल से पूरा हो पाता है।
विज्ञान वर्ग से पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को महोली, औरंगाबाद या फिर किसी निजी संस्थान का रुख करना पड़ता है। गरीब परिवारों के लिए निजी कॉलेजों की ऊंची फीस वहन करना बेहद कठिन है। इस साल करीब 200 बच्चों ने कला वर्ग में दाखिला लिया है। इसमें 130 छात्राएं और 70 छात्र हैं।
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अभिभावक बोले-जनप्रतिनिधियों को देना चाहिए ध्यान
अभिभावक संदीप शुक्ला ने कहा कि आज के समय में विज्ञान पढ़े बिना बच्चों का भविष्य अधूरा है। सरकार और जनप्रतिनिधियों को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। शिवेंद्र गुप्ता ने कहा कि अगर क्षेत्र में ही विज्ञान की पढ़ाई की सुविधा हो जाए तो न सिर्फ बच्चों का भविष्य संवर जाएगा बल्कि बाहर जाने का खर्च भी बचेगा। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सरकार ने अब तक इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया है। क्षेत्रवासी मांग कर रहे हैं कि सरकार जल्द से जल्द विज्ञान वर्ग की मान्यता दिलाकर यहां के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर प्रदान करें। सांसद आनंद भदौरिया का कहना है कि प्रबंध समिति को औपचारिकता पूरी करनी चाहिए, कहीं पर कोई समस्या आती है तो हम हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं।