पं. रामदेव मिश्र शास्त्री। संवाद।
बांकेगंज। शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी या महाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। तृतीया तिथि दो दिन पड़ने से इस बार अष्टमी की तिथि को लेकर भ्रम बना हुआ था। इसके कारण नवरात्र भी इस बार 10 दिन के हो गए हैं।
छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ के ज्योतिषाचार्य का कहना है कि अष्टमी तिथि नवरात्र के आठवें दिन नहीं, बल्कि नवम दिन पड़ रही है। इसके कारण 30 सितंबर को मां दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी। अष्टमी की तिथि 29 को शाम 4 बजकर 31 मिनट पर प्रारंभ होकर 30 सितंबर मंगलवार को शाम 6 बजकर छह मिनट पर समाप्त होगी।
उदयातिथि के अनुसार, अष्टमी 30 सितंबर को मनाई जाएगी। बताया कि इस बार दुर्गा अष्टमी शोभन योग में पड़ रही है, जो कि शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि नवरात्र में कन्या पूजन विशेष रूप से अष्टमी और नवमी तिथियों को किया जाता है। इस बार कन्या पूजन भी 30 सितंबर को होगा। इस दिन नौ कन्याओं को आमंत्रित कर भोजन कराने से पुण्य मिलता है। मां महागौरी अत्यंत वर्ण की देवी हैं। अष्टमी पर विधिवत षोडशोपचार विधि से मां महागौरी की पूजा करने से जीवन के सभी दोष समाप्त होते हैं, और सुख-समद्धि की प्राप्ति होती है।
दुर्गा अष्टमी पूजन के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्न मुहूर्त : सुबह 04:37 से 05:25 मिनट तक- स्नान और ध्यान के लिए उत्तम समय।
- अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11:47 से 12:35 मिनट तक पूजन- शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ।
-निशिता काल मुहूर्त : रात्रि 11:47 से 12:35 मिनट तक- रात्रिकालीन पूजा के लिए उपयुक्त।