तापमान में लगातार बढ़ोतरी से जनजीवन बेहाल
सूख रहे ताल तलैया, नदियों के जलस्तर में गिरावट
भूगर्भीय जलस्तर में भी लगातार गिरावट जारी
पिछले तीन दिनों से कड़ी धूप, भीषण गर्मी और गर्म लू के चलते आम जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सूरज की तपिश से धरती तक तपने लगी है। गर्म लू के थपेड़े बदन को झुलसा रहे हैं। दोपहर के समय तो हालत यह हो जाती है कि सड़कों पर सन्नाटा नजर आने लगता है। लगता है सड़कों से जैसे लपटें निकल रही हैं।
गुरुवार को अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। पिछले दिनों आंधी और बारिश के बाद मौसम के जो तेवर ढीले हुए थे वह एक बार फिर कड़े हो गए हैं। बढ़ते हुए तापमान ने गर्मी और बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार को सुबह से ही सूरज की तपिश ने अपना असर दिखाना शुरू किया। त्वचा को झुलसाने वाले धूप में गर्म हवाओं ने मुसीबतें और बढ़ा दीं। इससे लोगों को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। सड़कों पर निकले लोग छाया तलाशते दिखे।
पिछले एक माह से हो रही कड़ी धूप और भीषण गर्मी से गांवों के तालाब पोखर सूखने लगे हैं। नदियों का जलस्तर कम हो गया है इससे पशु पक्षियों के लिए पानी का संकट पैदा हो गया है। भूगर्भ जलस्तर भी लगातार नीचे गिर रहा है। उधर, शहर में भी पानी की मांग बढ़ गई है। पानी की बोतलों और पानी पाउच की बिक्री में इजाफा हुआ है। पानी की जरूरत को देखते हुए समाजसेवी संगठनों ने लोगों को ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर प्याऊ लगवाए हैं।
इस भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही है। जाते समय तो मौसम ठीक रहता है लेकिन वापसी में इतनी कड़ी धूप हो जाती है कि नन्हीं सी जान के लिए आफत होती है। रिक्शों और साइकिल से लौटते बच्चे पसीने से तर बतर होकर हांफ रहे होते हैं। इनके अलावा फील्ड वर्क करने वाले लोगों, पल्लेदारों, भवन निर्माण में लगे मजदूरों और रिक्शा चालकों पर कड़ी धूप और भीषण गर्मी काफी भारी पड़ रही है।