लखीमपुर खीरी। अनियमित दिनचर्या और खानपान युवाओं को फैटी लिवर का शिकार बना रही है। इसमें नॉन एल्कोहलिक मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शारीरिक श्रम का अभाव और तली-भुनी चीजों के साथ फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन लिवर को बीमार कर रहा है। जिले में करीब 40 प्रतिशत लोग फैटी लिवर का शिकार हैं।
जिला अस्पताल फिजिशियन डॉ. शिखर बाजपेई ने बताया कि फैटी लिवर की समस्या पहले जहां 40 साल के बाद सामने आती थी, लेकिन अब युवाओं में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। रोजाना 150 से अधिक की ओपीडी में 10 से 15 लोग ऐसे आते हैं, जिनकी जांच कराने पर फैटी लिवर की समस्या सामने आती है। उन्होंने बताया कि लिवर के फैटी होने का मुख्य कारण बदलती जीवनशैली और असंतुलित खान पान है।
इसके लक्षण शुरूआत में नहीं दिखते, मगर अल्ट्रासाउंड एवं ब्लड जांच में इसका पता चलता है। उन्होंने बताया कि स्वस्थ पुरुष के पेट का साइज 90 और महिला के पेट का साइज 80 सेंटीमीटर से कम होना चाहिए, इससे अधिक मोटापा होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
बिगड़ा खान पान दे रहा मोटापा
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. विजय प्रकाश वर्मा बताते हैं कि खानपान से लेकर रहन सहन अव्यवस्थित है। लोग तला भुना और फास्ट फूड का सेवन अधिक कर रहे हैं। वसा की अधिकता और शारीरिक श्रम के अभाव से मोटापा बढ़ता है, जिससे लिवर फैटी हो रहा है। ऐसे में लिवर की कोशिकाओं पर वसा जमने लगती है। सूजन आ जाती है। लिवर को स्वस्थ रखने के लिए पपीता, आंवला, नीबू, त्रिफला, मट्ठा आदि का सेवन करें। यदि शुगर नहीं है, तो गन्ने का रस पिएं। शुगर रोगी जामुन के सिरके का प्रयोग कर सकते हैं।
जिला अस्पताल में ओपीडी- 1300
फैटी लिवर के पहुंच रहे मरीज- 80 से 90
ये लक्षण हैं तो डॉक्टर को दिखाएं
1. यदि अचानक भूख कम लगने लगी हो।
2. आंखों में पीलापन हो।
3. पेशाब का रंग पीला हो।
4. पेट में दर्द रहने के साथ उल्टी की समस्या है।
5. कब्ज रहना, भोजन का न पचना
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यह बरतें सावधानी
2. तला-भुना और अधिक मसाले वाला भोजन न करें।
3. फास्ट फूड का सेवन करने से बचें।
4. नियमित रूप से व्यायाम एवं योग करें।
5. समय पर भोजन करें, पर्याप्त नींद लें और साफ पानी पिएं।