उचौलिया (खीरी)। गांव लोदियापुर में मंगलवार को 11 केवी लाइन की मरम्मत करते समय संविदा लाइनमैन अतुल मिश्र की करंट लगने से मौत हो गई। वह गोकन 33 केवी विद्युत उपकेंद्र में तैनात थे।
सूचना पर एसडीओ मोहम्मदी शुभम मौर्य और थाना प्रभारी निरीक्षक गोपाल नारायण सिंह मौके पर पहुंचे और जांच की। थाना क्षेत्र के गांव जहूरपुरवा निवासी अतुल मिश्र (35) पुत्र राधेश्याम मिश्र खंभे पर चढ़कर विद्युत लाइन की मरम्मत कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान अचानक लाइन जोड़ दिए जाने से वह करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अतुल मिश्र के परिवार में आठ वर्षीय पुत्र रितिक और 11 वर्षीय पुत्री पारुल हैं। एसडीओ ने बताया कि हादसा सहिजना फीडर की लाइन पर काम करते समय हुआ। मामले की जांच कराई जा रही है। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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लापरवाही की कीमत: पहले भी जा चुकी हैं कई संविदा कर्मचारियों की जान
लखीमपुर खीरी/उचौलिया। विद्युत निगम में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की करंट लगने से मौत की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। हर हादसे के बाद जांच और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।
बिजली लाइनों पर काम के दौरान सबसे बड़ा खतरा शटडाउन व्यवस्था में लापरवाही को माना जाता है। कई मामलों में लाइन बंद होने की सूचना के बावजूद करंट रहने या पर्याप्त सुरक्षा जांच के बिना कर्मचारियों को खंभों पर चढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं। इसके चलते कई संविदा कर्मचारी जान गंवा चुके हैं।
15 मई 2026 को गोला डिवीजन के सिंकदराबाद क्षेत्र में रायपुर निवासी संविदा लाइनमैन महेश गुप्ता की मौत हो गई थी। वह शटडाउन पर लाइन पर काम कर रहे थे, तभी सप्लाई चालू होने से करंट लग गया। मामले में एसएसओ समेत दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और जेई को निलंबित किया गया था।
उचौलिया क्षेत्र में भी पिछले वर्षों में कोटरा निवासी पंकज मिश्र, गुरुद्वारा क्षेत्र के अनिरुद्ध सिंह ठाकुर समेत कई संविदा कर्मचारियों की करंट लगने से मौत हो चुकी है।
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि भीषण गर्मी में जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने के दबाव में कई बार सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है। उनका कहना है कि हादसों के बाद जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। पीड़ित परिवारों को मुआवजा तो मिल जाता है, लेकिन दुर्घटनाओं के कारणों पर ठोस कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है। यही वजह है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं।