बाघ के चार लोगों के जान लेने से गांव में फैल गई थी दहशत
अगस्त के दूसरे पखवाड़े में पूरे दो हफ्ते तक आदमखोर बाघ की दहशत के साए में जी रहे मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव में अब जिंदगी और खेती किसानी पुन: पटरी पर लौटने लगी है। खेतों में लोगबाग काम करते दिखाई देने लगे हैं और बाघ की दहशत भी धीरे-धीरे लोगों के दिलोदिमाग से निकलने लगी है।
बाघ ने सबसे पहले सात जुलाई को मैलानी रेंज के मोहरैना कक्ष संख्या सात में जंगल में लकड़ी बीनने गए खरेहटा निवासी 60 वर्षीय भोगन कश्यप की जान ले ली थी। 15 अगस्त को मैलानी रेंज के सुआबोझ वन ब्लाक में लकड़ी बीनने गई ग्राम पंचायत सुआबोझ के कपरहा कुआं निवासी हिंछलाल की 14 वर्षीय पुत्री सरस्वती पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके तीन दिनों बाद बाघ ने मैलानी रेंज के गांव छेदीपुर में 19 अगस्त को खेत की रखवाली कर रहे छेदीपुर निवासी 60 वर्षीय टीकाराम की जान ले ली थी। अगले ही दिन भरिगवां बीट के आरक्षित वन क्षेत्र के पास खेत में काम कर रहे छेदीपुर निवासी 65 वर्षीय बाबूराम को मार डाला था। इसके 10 दिनों बाद बाघ ने 30 अगस्त को भरिगवां निवासी जानकी प्रसाद की जान ले ली थी। इससे खासकर छेदीपुर ही नहीं आसपास के ग्रामीण भी दहशत के साए में जी रहे थे। इसके अगले ही दिन वन विभाग की टीम ने 31 अगस्त को आदमखोर बाघ को ट्रैंक्विलाइज कर पकड़ने में कामयाबी हासिल कर ली थी। अब बाघ को पकड़े जाने के बाद चार दिन गुजर गए हैं और तबसे कहीं बाघ के दिखाई देने की सूचना नहीं मिली है, इससे ग्रामीणों को भी यकीन हो गया है कि पकड़ा गया बाघ ही हमलावर था। इस वजह से अब छेदीपुर गांव में लोग अपने खेतों में कामकाज के लिए जाने लगे हैं और दो हफ्ते से रुका उनका खेती का काम धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है। लोग खेतों की निकाई कराने, खाद डालने और कीटनाशकों के छिड़काव के काम में लग गए हैं। छेदीपुर निवासी नंगू ने बताया कि उनके धान के खेत में बहुत ज्यादा घास हो गई थी अब वे खेत की निकाई करा रहे हैं।
शरारती तत्व फैला रहे बाघ की दहशत
लखीमपुर खीरी। जिले के कई इलाकों में बाघ देखे जाने की चर्चा जोरों पर हैं। इससे लोग दहशतजदा हैं। हालांकि वन अधिकारी इसे अफवाह बता रहे हैं, क्योंकि इन इलाकों में किसी ने भी खुद बाघ को नहीं देखा और न ही कहीं कोई पग चिह्न मिले हैं।
ममरी। हैदराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम गनेशपुर के इर्द गिर्द गन्ने के खेतों में बाघ की दहशत है। गांव वालों की माने तो पुलिस कर्मियों ने कसबा ममरी, गनेशपुर, महेशपुर, जनकपुर, देवीपुर, कन्हैयागंज, अशर्फीगंज, गौरीगंज आदि ग्रामों में मकानों, दुकानों के बाहर सोने वाले लोगों को शनिवार की रात मकान के भीतर लेटने और पशुओं को अंदर बांधने की सलाह दी। वनरेंज मोहम्मदी, महेशपुर के फारेस्टर रमेश कुमार मिश्र आदि वनकर्मियों ने इसे अफवाह बताया है। वनकर्मियों का कहना है कि जब बाघ को किसी ने देखा ही नहीं है और न ही किसी पशु पर हमला करने की चर्चा है तो कैसे माना जाए कि बाघ गन्ने के खेतों में मौजूद है।
सिकंद्राबाद। गांव बिलहरी में भी बाघ की दहशत फैल गई है। गांव निवासी 35 वर्षीय उमेश कुमार ने बताया कि वह खेत पर चारा लेने गया था तो वहां बाघ को देखकर घबरा गया। इसके बाद गांव भर में बाघ देखे जाने की चर्चा शुरू हो गईं। हालांकि वन अधिकारियों को किसी ने भी बाघ देखे जाने की सूचना नहीं दी।
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लोगों में मगरमच्छ का खौफ
बिजुआ। नौसर जोगी की बस्ती कि किनारे एक तालाब में मौजूद मगरमच्छ का खौफ इस कदर छाया है कि लोगों रातें जागते हुए कट रही है। दो दिन पहले लोगों ने भीरा और गोला रेंज के कर्मचारियों को फोन कर मगरगच्छ के बारे में जानकारी दी थी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सोमवार को दिन में मगरमच्छ ने दो पालतू बतख एवं वनमुर्गी का शिकार बना लिया।