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गांवों में खोले गए राजकीय पुुस्तकालय हुए बंद

Thu, 13 Jul 2017 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
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 पिछले तीन साल के दौरान गांवों में खोले गए राजकीय पुस्तकालयों को अब ई-लाइब्रेरी से जोड़ने की दिशा में सरकार कदम उठाने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही कई पुस्तकालय बंद हो गए हैं। पुस्तकालय सहायकों का नवीनीकरण भी नहीं किया गया है। आउट सोर्सिंग संस्था को प्रदेश सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने से पुुस्तकालय सहायक असमंजस की स्थिति में हैं। बता दें कि वर्ष 2014 के बाद से अब तक 22 गांवों में राजकीय जिला पुुस्तकालय के विस्तार पटल खोले गए थे, जिनका नाम अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय पुस्तकालय एवं जन सूचना केंद्र कर दिया गया है। इन पुस्तकालयों की स्थापना के बाद पुस्तकालय सहायक की नियुक्ति हुई थीं, लेकिन आउट सोर्सिंग कंपनी के ब्लैैक लिस्टेड होने से 30 जून 2017 के बाद सहायकों का नवीनीकरण नहीं होने से पुस्तकालय में ताले लटक गए। जबकि डिजीटल इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए पुस्तकालयों की अत्यधिक उपयोगिता मानी जा रही है। तहसील, ब्लॉक और ग्राम स्तर के पुस्तकालयों को कई तरह की गतिविधियां कराने के अधिकार मिलने वाले हैं। सभी पुस्तकालयों का ई-लाइब्रेरी से जोड़ा जाएगा। आम लोगों के बीच साहित्यिक परिचर्चा, निबंध लेखन जैसी प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। 
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