खेतों में लगाया गया नाइट विजन कैमरा। संवाद
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धौरहरा। धौरहरा वनरेंज के चकदहा और साहबदीन पुरवा गांव में दो बच्चों की जान लेने वाला तेंदुआ रोज जगह बदल रहा है। सोमवार रात वह घटनास्थल पर तो नहीं आया, लेकिन उसके पगचिह्न घाघरा नदी की तलहटी में देखे गए, जिससे यह साबित हो रहा है कि तेंदुआ सोमवार को भी आया था, लेकिन कैमरे की नजर से दूर रहा। वन विभाग अब उसके पगचिह्नों के सहारे उसकी तलाश में जुट गया है।
तेंदुआ कैमरों की पकड़ से दूर है, तेंदुआ सोमवार की रात भी आया और घाघरा नदी की तलहटी में चहलकदमी करता हुआ कहीं छिप गया। वन विभाग की टीम ने उसे पकड़ने के लिए तीन पिंजरे और जीपीएस सिस्टम से लैस नौ नाइट विजन कैमरे लगाए हैं। वन विभाग की टीम तेंदुए के पगचिह्न देख कर उसके सहारे पेट्रोलिंग कर रही है। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बताया कि तेंदुआ सोमवार की रात आया जरूर, लेकिन घटनास्थल से दूर रहा, जिससे वह कैमरों में कैद नहीं हो सका। घाघरा नदी की तलहटी में पगचिह्न देखे गए हैं। यह पगचिह्न कहां तक जा रहे हैं, वन विभाग की टीम इस बात की खोजबीन कर रही है। उन्होंने कहा जरूरी हुआ तो कैमरों और पिंजरों की लोकेशन बदली जाएगी।
तेंदुए के भय से खेतों तक नहीं जा रहे ग्रामीण
दो बच्चों की मौत के बाद ग्रामीणों में तेंदुए का इस कदर भय है कि लोग खेतों की ओर भी नहीं जा रहे हैं जबकि धान की फसल लगभग पक चुकी है। ग्रामीण छोटे लाल, हरीश, रामलोचन, दीनदयाल, तीरथराम यादव आदि बताते हैं कि तेंदुआ जबतक पकड़ में नहीं आता। तबतक ग्रामीणों की जान हलक में है।