- छटनी में भी नहीं निकले मानक के बोरे
- अधिकारी से लेकर मिल मालिक तक हलकान
- शासन स्तर से खरीदकर जिले में सप्लाई हुए बोरे
सरकारी धान खरीद में प्रयोग किए जाने वाले सरकारी बोरे मानक पर खरे नहीं उतर रहे हैं, जिससे हिचकोले ले रही धान खरीद फिर से बंदी की कगार पर पहुंच गई है। अधिकारी से लेकर मिल मालिक तक एफसीआई के गोदामों पर चावल का उतार न होने से हलकान हैं। तो वहीं सबसे बड़ा झटका किसानों को लगा है, जिन्हें राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आला अधिकारियों को भी मामले की भनक है, लेकिन इस मसले पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जबकि अधिकांश गांठों के बोरे की छटनी में भी मानक पूरे नहीं हो सके हैं।
बता दें कि सरकार ने एफसीआई में चावल की डिलीवरी देने के लिए बोरे के संबंध में भी मानक निर्धारित कर रखे हैं, जिसके मुताबिक खाली जूट के बोरे का वजन 585 ग्राम होना चाहिए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि बोरों की खरीद शासन स्तर पर होती है, जहां से जिलों में बोरे की गांठें सप्लाई की जाती है। ज्यादातर बोरों की सप्लाई कोलकाता से होती है। इस वर्ष धान खरीद में ढुलमुल रवैये के बाद जब चावल उतरने की बारी आई, तो सरकारी तंत्र की भारी खामी उजागर हो गई है। जूट के बोरों का वजन कम होने से एजेंसियों द्वारा एफसीआई को होने वाली चावल की डिलीवरी ठप हो गई है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है। वहीं शासन स्तर से होने वाली बोरों की डील में घोटाले का छेद सबके सामने आ चुका है। पहले से धान खरीद में ना-नुकर कर रही एजेंसियों को चावल की डिलीवरी न हो पाने का बहाना मिल गया है, जिससे तमाम क्रय केंद्रों पर धान खरीद फिर से ठप हो गई है। यूपी स्टेट एग्रो और एसएफसी ने भी बुधवार को धान नहीं खरीदा। बताते चलें कि खरीफ सीजन में जिले को 2700 गांठे (13.50 लाख बोरे) मिली हैं। एफसीआई ने इन बोरों में पैक चावल को उतरने से इंकार करते हुए कई गाड़ियां लौटा दी थी, जिसके बाद बोरों की छटनी कराई गई है। तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए हैं। चावल की आपूर्ति ठप होने से एजेंसियों के सामने भुगतान की दिक्कत खड़ी हो गई, जिससे कई किसानों का 2.75 करोड़ रुपये भुगतान अटक गया है। जिला स्तरीय अधिकारी भी बोरे के मानक की समस्या का हल तलाश नहीं पाए हैं।
मामले की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। अब बोरों की छटनी कराने के बाद चावल की भर्ती कराने के निर्देश दिए गए हैं। शासन स्तर से प्राप्त निर्देशों के मिलने पर बोरे की समस्या को सुलझाने के प्रयास किए जाएंगे।
- कौशल देव, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
कम वजन के बोरे निकलने की जानकारी है, जिसके लिए संबंधित एजेंसियों के प्रभारियों और एफसीआई से बातचीत कर जल्द ही हल निकाला जाएगा।
- उमेश नरायण पांडेय, एडीएम