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आम आदमी की थाली से रूठ गई दाल की कटोरी

Fri, 22 May 2015 06:48 PM IST
लखीमपुर खीरी
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पिछले एक माह से दाल के मूल्यों में आए उछाल से आम आदमी को दाल-रोटी तक चलाना मुश्किल हो रहा है। पिछले एक माह के अंदर सभी दालों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। मौसमी सब्जियां पहले ही महंगी हो चुकी हैं। अब आम आदमी की थाली से दाल की कटोरी भी रूठ गई है। ढाबों पर मिलने वाली दाल में पानी की मात्रा बढ़ गई है। दाल और सब्जी व्यवसायी कहते है कि बेमौसम बारिश के कारण महंगाई बढ़ी है।
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बाजार में दालों के दामों में पिछले एक माह में एकाएक उछाल आया है। एक माह पहले तक 95 रुपये प्रति किलो बिकने वाली अरहर की दाल इस समय 105 रुपया प्रति किलो बिक रही है। उरद और चने की दाल में भी उछाल आया है। दाल व्यवसायी महेंद्र गुप्ता बताते हैं कि दालों के उत्पादन में लगातार आ रही कमी के कारण पिछले कई वर्षों से दालों के मूल्य बढ़ रहे थे लेकिन पिछले एक माह में दालों के मूल्यों में जितना उछाल आया है उतना इसके पहले कभी नहीं आया। घर में दाल लगभग रोज ही बनती है। इससे रसोई का बजट बुरी तरह गड़बड़ा गया है।
ढाबों पर फीका हुआ दाल का स्वाद
सीतापुर रोड पर ढाबा चलाने वाले राजवीर यादव कहते हैं कि ग्राहकों को उनके ढाबे की दाल काफी पसंद है। दाल महंगी होने पर न क्वालिटी से समझौता कर सकता न ही दाल के दाम बढ़ाए जा सकते हैं। घाटा जरूर उठाना पड़ रहा है। निघासन में ढाबा चलाने वाले राम किशुन का कहना है कि दाल के मूल्यों में बढ़ोतरी से नुकसान उठाकर ग्राहकों को दाल खिलानी पड़ रही है।
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सब्जी और दाल हुई महंगी कैसे चले रसोई
गृहणी रामकली कहती हैं कि सब्जियां पहले ही महंगी हो चुकी थीं अब दालों के दाम बढ़ने से रसोई का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। रश्मि गौतम कहती हैं कि दालें पहले से ही महंगी थीं अब और ज्यादा महंगी होने से बच्चों को दाल खिलाना भी मुश्किल हो रहा है। रानी रावत का कहना है कि दालों के दाम बढ़ने से रसोई का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
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