मंदिर में स्थापित है चार हजार साल पुराना शिवलिंग
मंदिर की देखरेख करने वाले महंत रमेश गिरि बताते हैं कि मंदिर में एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। यह करीब चार हजार साल पुराना है। 25 साल पहले पुरातत्व विभाग की टीम ने इस मंदिर का सर्वे किया था। शिवलिंग का वैज्ञानिक परीक्षण कर इसे 3800 साल पुराना बताया था। मंदिर भूतल से कुछ नीचे एक अरघे में स्थापित है। इसका आकार काफी बड़ा है। मान्यता है कि सच्चे मन से जो भगवान भोलेनाथ से मनौती मांगता है, उसकी मनौती पूरी होती है। यहां लोग बच्चों का मुंडन और अन्नप्रासन कराने आते हैं। मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु भंडारे करते हैं।
यहां लगे हैं दुर्लभ कदंब के चार पेड़
महंत रमेश गिरि बताते हैं कि किसी समय पूरे परिक्षेत्र में कदंब के हजारों पेड़ लगे थे। इस क्षेत्र को कजरी वन कहते थे। अब यह पेड़ कट चुके हैं, लेकिन कदंब के चार पेड़ अब भी मंदिर के पास लगे हैं। महंत का दावा है कि जिस प्रजाति के कदंब गजमोचन नाथ मंदिर परिसर में लगे हैं उस प्रजाति के कदंब के पेड़ उत्तर प्रदेश में कहीं भी नहीं हैं। मंदिर के आसपास दूर दूर तक ऊंचे टीले हैं। उनकी खोदाई करने पर प्राचीन ईंटे मिलती हैं। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कभी इस जगह समृद्ध बसावट रही होगी।