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Sawan 2023: गजमोचन नाथ मंदिर में स्थापित है 4000 वर्ष पुराना शिवलिंग, यहीं हुआ था गज-ग्राह का भयंकर युद्ध

Mon, 07 Aug 2023 07:59 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

लखीमपुर-मोहम्मदी रोड किनारे ग्राम पंचायत रोशननगर में प्राचीन गजमोचन नाथ मंदिर स्थित है। किवंदती है कि पहले यहां से आदि गंगा गोमती प्रवाहित होती थी। आज भी इस पवित्र नदी के अवशेष झील के रूप में मौजूद है। 
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गजमोचन नाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी के गोला क्षेत्र में प्राचीन गजमोचन नाथ मंदिर है। कहा जाता है कि यहीं पर हाथी (गज) और मगरमच्छ (ग्राह) के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। भगवान विष्णु ने मगरमच्छ को मारकर हाथी की रक्षा की थी। गजमोचन नाथ मंदिर में दिव्य शिवलिंग भी स्थापित है। यह शिवलिंग करीब 4000 साल पुराना बताया जाता है। यहां हर अमावस्या को मेला लगाता है। सावन के हर सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। दूर दूर आकर कांवड़िये गजमोचन नाथ मंदिर में आकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।

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लखीमपुर-मोहम्मदी रोड किनारे ग्राम पंचायत रोशननगर में प्राचीन गजमोचन नाथ मंदिर स्थित है। किवंदती है कि पहले यहां से आदि गंगा गोमती प्रवाहित होती थी। आज भी इस पवित्र नदी के अवशेष झील के रूप में मौजूद है। कहा जाता है कि आदि गंगा गोमती में एक बार गजराज को मगरमच्छ ने पकड़ लिया था। गजराज की करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने मगरमच्छ का मार उसे मुक्त कराया। तब से इस स्थान का नाम गजमोचन नाथ पड़ा। यहां स्थित झील को गजमोचन झील कहते हैं। यह झील ढाई किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली है।

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मंदिर में स्थापित है चार हजार साल पुराना शिवलिंग

मंदिर की देखरेख करने वाले महंत रमेश गिरि बताते हैं कि मंदिर में एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। यह करीब चार हजार साल पुराना है। 25 साल पहले पुरातत्व विभाग की टीम ने इस मंदिर का सर्वे किया था। शिवलिंग का वैज्ञानिक परीक्षण कर इसे 3800 साल पुराना बताया था। मंदिर भूतल से कुछ नीचे एक अरघे में स्थापित है। इसका आकार काफी बड़ा है। मान्यता है कि सच्चे मन से जो भगवान भोलेनाथ से मनौती मांगता है, उसकी मनौती पूरी होती है। यहां लोग बच्चों का मुंडन और अन्नप्रासन कराने आते हैं। मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु भंडारे करते हैं।
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यहां लगे हैं दुर्लभ कदंब के चार पेड़

महंत रमेश गिरि बताते हैं कि किसी समय पूरे परिक्षेत्र में कदंब के हजारों पेड़ लगे थे। इस क्षेत्र को कजरी वन कहते थे। अब यह पेड़ कट चुके हैं, लेकिन कदंब के चार पेड़ अब भी मंदिर के पास लगे हैं। महंत का दावा है कि जिस प्रजाति के कदंब गजमोचन नाथ मंदिर परिसर में लगे हैं उस प्रजाति के कदंब के पेड़ उत्तर प्रदेश में कहीं भी नहीं हैं। मंदिर के आसपास दूर दूर तक ऊंचे टीले हैं। उनकी खोदाई करने पर प्राचीन ईंटे मिलती हैं। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कभी इस जगह समृद्ध बसावट रही होगी।
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