एक तरफ बकाया राजस्व वसूली बढ़ाने को लेकर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम अलग-अलग पद सृजित कर रहा है, वहीं जिले के लखीमपुर और गोला डिवीजन में बकाया वसूली को लेकर अधिकारियों की उदासीनता देखते बन रही है। दोनों डिवीजनों में घरेलू, मोबाइल टॉवर, सरकारी बकाया के 40 करोड़ रुपया बकाया है, लेकिन बकाए की धनराशि पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है।
लखीमपुर डिवीजन में स्थित कुल 220 टॉवरों पर पिछले दो साल से करीब दो करोड़ रुपये बकाया चल रहा है, लेकिन अभी तक वसूली के लिए न तो नोटिस जारी की गई है और न ही कनेक्शन काटने का अभियान शुरू किया गया है। वहीं घरेलू कनेक्शन पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 20 करोड़ रुपये राजस्व बाकी है। इसी तरह कामर्शियल कनेक्शनों पर दो करोड़ और पावर कनेक्शनों पर 50 से 60 लाख रुपये बकाया है। लखीमपुर डिवीजन में सरकारी बकाया पांच करोड़ से भी अधिक है। इसमें अकेले बेसिक शिक्षा विभाग पर ही तीन करोड़ रुपये बाकी है। पिछले दो सालों से बेसिक शिक्षा विभाग ने बिजली बिल जमा नहीं किया है। पिछले दिनों डिवीजन के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में चलाए गए विभाग के अभियान का भी बकाया राजस्व पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि अधिकारी उन्हीं बिजली बिलों की वसूली पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जहां से नियमित बिल जमा हो रहे हैं। जो बकाया राजस्व है, उस पर कोई खास ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
हालांकि अधिशाषी अभियंता रजनीकांत मिश्रा कहते हैं कि राजस्व वसूली पर विशेष नजर रखी जा रही है। हर महीने लक्ष्य के मुताबिक वसूली हो रही है। वहीं गोला डिवीजन में बकाया वसूली को लेकर प्रक्रिया तेज होने के कारण वसूली की रफ्तार बढ़ी है। गोला में स्थित कुल 250 मोबाइल टावरों पर बकाए का निस्तारण कर दिया गया है। वहां घरेलू कनेक्शनों पर करीब छह करोड़ और सरकारी बकाया 40 से 50 लाख ही शेष है। अधिशाषी अभियंता उमेश सोनकर का कहना है कि गोला की अपेक्षा लखीमपुर डिवीजन की वसूली ज्यादा है। हालांकि राजस्व वसूली को लेकर गोला डिवीजन में सभी अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी की गई है, जिसकी नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है।