पलियाकलां। किशनपुर रेंज के जंगल के चलतुआ गांव के लोगों का पुनर्निवासन अब भी अटका हुआ है। यह गांव पीलीभीत और लखीमपुर खीरी के बीच है। इस कारण राजस्व व वन अफसरों के बीच सामंजस्य की कमी से यहां अभी सर्वे कार्य ही चल रहा है। ग्रामीणों को दो हेक्टेयर जमीन या फिर 15 लाख रुपये मुआवजे के दो विकल्प दिए गए, मगर बात अभी बनी नहीं है।
पीलीभीत के थाना सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र का चलतुआ गांव किशनपुर सेंक्चुरी के जंगल में बसा है। गांव में पहुंचने के लिए जंगल के बीचोंबीच से होकर चार किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। आवागमन के लिए एक पगडंडी बनी है। गांव में प्राथमिक स्कूल है, लेकिन बिजली, सड़क, मोबाइल फोन के नेटवर्क का अभाव है। चारों तरफ घना जंगल होने से आए दिन यहां वन्यजीवों का खतरा भी मंडराता रहता है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए जंगल से ग्रामीणों को बाहर बसाने की योजना है। इसके तहत ही कर्तनिया घाट वन्यजीव प्रभाग क्षेत्र के भरतापुर गांव में 118 परिवार चिन्हित किए गए हैं। इन्हें पहले चरण में दूसरी जगह बसाया जाएगा। हाल ही में इस मामले को लेकर केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन मंत्री अरुण सक्सेना व वन राज्यमंत्री केपी मलिक के साथ दुधवा के पर्यटन परिसर में अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। इसमें तय हुआ था कि जंगल के बीचोबीच स्थित गांवों के ग्रामीणों को वहां से पुनर्वासित कर दूसरी जगह पर बसाया जाएगा।
भरतापुर में 215 व किशनपुर में रह रहे 150 परिवार
दुधवा टाइगर रिजर्व के कतर्निया घाट में बसे गांव भरतापुर में 215 परिवार रह रहे हैं। वहीं, किशनपुर सेंक्चुरी में बसे गांव चलतुआ में 150 परिवार निवासरत हैं। इन गांवों के लोगों ने वन विभाग की जंगल से विस्थापित करने की नीति के तहत जंगल से बाहर बसाने के लिए आवेदन भी किया था। इसके चलते इन दो गांवों को सरकार ने जमीन या फिर रुपये का प्रस्ताव रखा था।
वर्ष 2021 से चल रही योजना
दुधवा टाइगर रिजर्व के कर्तनिया घाट व किशनपुर के चलतुआ गांव को वर्ष 2021 से विस्थापन कराने की योजना चल रही है, लेकिन इसको असली अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था। दुधवा के तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने इसको लेकर काफी प्रयास किए थे। ग्रामीणों से संवाद भी किया था। इसके बाद ग्रामीण जमीन के बदले जंगली क्षेत्र छोड़ने के लिए तैयार हुए।
वर्जन
गांवों के जंगल से हटाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। बाकी उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कार्य होंगे। मानव-वन्यजीव संघर्षों को रोकने की कड़ी में नया आदेश मील का पत्थर साबित होगा।
-डाॅ. रंगाराजू टी, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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सर्वे रिपोर्ट वन विभाग के अफसरों को भेज दी गई थी। गांव के लोगों की विकल्प चुनने के लिए फिर शीघ्र ही बैठक कराई जाएगी। ग्रामीणों की राय जानने के बाद फिर रिपोर्ट अफसरों को भेजी जाएगी। उच्च अफसरों के निर्देश मिलने पर अगली कार्रवाई होगी।
- अजीत प्रताप सिंह, एसडीएम, पूरनपुर
दुधवा टाइगर रिजर्व जाने वाला द्वार। संवाद