करीब पांच महीने से हड़ताल पर चल रहे भट्ठा मालिकों के साथ-साथ किसान-कुम्हारों के लिए राहत भरी खबर है कि अब खनन के पूर्व पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी की अनिवार्यता की बाध्यता से छूट मिल गई है। इस संबंध में बुधवार को भारत सरकार ने गजट जारी कर दिया है, जिसमें सिंचाई के लिए तालाब और पेयजल के लिए कुओं की खुदाई के लिए भी राहत दी गई है।
बता दें कि कोर्ट ने किसी भी तरह खनन से पूर्व पर्यावरण मंत्रालय से स्वच्छता का अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद एनओसी प्राप्त करने में आने वाली जटिलताओं को देखते हुए भट्ठा मालिकों ने इस फैसले के विरोध में ईंट पथाई से लेकर भट्ठे बंद कर हड़ताल शुरू कर दी। इससे जिले के करीब 200 भट्ठों में ईंट पथाई का कार्य बंद हो गया, जिससे भट्ठों का संचालन ठप हो गया। नतीजतन पहला असर मजदूरों पर पड़ा और हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए। उधर, भट्ठा स्वामियों द्वारा जमा किए जाने वाले सरकार के देय कर भी नहीं जमा किए गए, जिससे राजस्व की भारी क्षति हो रही है। दूसरी तरफ किसानों-कुम्हारों के लिए भी यह गजट राहत भरा साबित होगा। इससे किसान बाढ़ के पश्चात खेतों में होने वाले मिट्टी के जमाव को हटा सकेंगे। कुम्हार, खिलौना बनाने वाले कारीगरों और ग्राम पंचायतों में होने वाले कार्यों के लिए बालू-मिट्टी के खनन आसानी से हो सकेगा। वहीं, मनरेगा से होने वाले कार्यों को राहत मिलेगी और तालाबों-सड़कों का निर्माण कार्य के लिए खुदाई करना आसान हो जाएगा।
इस गजट आदेश की जानकारी मिली है। अब भट्ठा मालिकों को पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। ईंट भट्ठा उद्योग पूर्व की भांति गति पकड़ सकेगा और लोगों को रोजगार प्राप्त हो सकेंगे। अब प्रदेश सरकार द्वारा इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी किया जाएगा, जिसके पश्चात हड़ताल स्वत: समाप्त हो जाएगी। - नरेंद्र सिंह, अध्यक्ष, ईंट निर्माता समिति, लखीमपुर
अभी इस संबंध में कोई शासनादेश प्राप्त नहीं हुआ है। सिर्फ मौखिक जानकारी मिली है। आदेश प्राप्त होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। - राजेश कुमार, खान निरीक्षक