लखीमपुर खीरी जिले की खीरी लोकसभा सीट काफी रोचक रही है। इस सीट पर वर्मा परिवार का 35 साल तक कब्जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इसी सीट से पिता, मां और बेटा तीनों सांसद बने, एक दो नहीं... तीन-तीन बार। राजनीति से जुड़े लोग तो यह कहते हैं कि ऐसा प्रदेश में कहीं नहीं हुआ।
खीरी लोकसभा सीट पर वर्ष 1952 में पहला चुनाव हुआ था। तब रामेश्वर प्रसाद नेवटिया सांसद बने। इसके बाद 1956 में दूसरे चुनाव में कुंवर खुशवक्त राय चुने गए थे। तीसरे चुनाव 1962 में बाल गोविंद वर्मा ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा और प्रसोपा के कु. खुशवक्त राय को हराकर चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने लगातार तीन बार चुनाव जीता। 1977 तक सांसद की कुर्सी पर विराजमान रहे। वर्ष 1977 में जब फिर चुनाव हुए तो बाल गोविंद को जनता पार्टी के प्रत्याशी सूरत बहादुर ने हरा दिया।
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इसके बाद अगला चुनाव 1980 में हुआ, जिसमें एक बार फिर से बाल गोविंद वर्मा ने किस्मत अजमाई और जनता पार्टी के सूरत बहादुर शाह को हराकर सांसद बने, लेकिन दुर्भाग्य यह रहा है कि शपथ ग्रहण से पूर्व ही उनका देहांत हो गया। ऐसे में 1980 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में बाल गोविंद की पत्नी ऊषा वर्मा चुनाव मैदान में उतरीं और जनता पार्टी के डॉ. जय शंकर बाजपेई को पराजित कर इस सीट की पहली महिला सांसद बनीं। इसके बाद वह लगातार तीन बार चुनाव जीतीं। वर्ष 1991 के चुनाव में ऊषा वर्मा ने फिर से किस्मत अजमाई, लेकिन भाजपा उम्मीदवार गेंदनलाल कनौजिया ने इनको हरा दिया। गेंदनलाल दो बार सांसदी का चुनाव जीते।
पिता स्व. बाल गोविंद, मां ऊषा वर्मा के तीन-तीन बार संसद बनने के बाद उनके बेटे रवि प्रकाश वर्मा की राजनीति में एंट्री हुई। 1998 में बेटे रवि प्रकाश वर्मा ने सपा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा। पहले ही प्रयास में चुनाव जीतकर संसद पहुंच गए, लेकिन अगले ही साल 1999 में किसी वजह से लोकसभा भंग हो गई। ऐसे में 1999 में फिर से चुनाव हुआ और उसमें फिर से रवि प्रकाश वर्मा जीत गए। 2004 के चुनाव में रवि प्रकाश वर्मा ने तीसरी बार चुनाव जीता। जब 2009 में लोकसभा सीट पर चुनाव हुआ तो चौथी बार में हार गए। वर्ष 2009 के चुनाव में जफर अली नकवी ने कांग्रेस से चुनाव जीता था।