लखीमपुर खीरी। शहर के बीचोबीच स्थित खपरैल बाजार वर्षों से व्यापार और भरोसे का केंद्र बना हुआ है। यह न सिर्फ अपनी ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है। इसकी खासियत यह है कि यहां इंसान के जन्म से लेकर अंतिम संस्कार तक से जुड़ा हर जरूरी सामान आसानी से मिल जाता है।
बुजुर्गों के अनुसार, खपरैल बाजार करीब 80 वर्ष पुराना है। स्थानीय बुजुर्ग अब्दुल हमीद, सलीम सिद्दीकी, सियाराम और राजेश भल्ला बताते हैं कि पहले पूरी बाजार में खपरैल की छतें हुआ करती थीं। इस कारण ही इस बाजार का नाम खपरैल बाजार पड़ा। समय के साथ कई दुकानदारों ने टिन व पक्की छतें डाल ली हैं लेकिन कुछ स्थानों पर आज भी खपरैल की छतें इस बाजार की पुरानी पहचान को जीवंत रखे हुए हैं।
उनका कहना है कि शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या किसी भी मांगलिक कार्यक्रम के लिए लोग खपरैल बाजार आए बिना अपनी खरीदारी अधूरी मानते हैं। कपड़ा, जूता-चप्पल, बर्तन, पूजा सामग्री, खानपान का सामान और रोजमर्रा की जरूरतों की हर वस्तु यहां मिल जाती है।
खास बात यह है कि खपरैल बाजार महिलाओं की पहली पसंद माना जाता है। यहां उचित दाम, वैराइटी और एक ही जगह सब कुछ मिलने की सुविधा महिलाओं को आकर्षित करती है। करीब 500 से अधिक दुकानों वाले इस बाजार से सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। जिलेभर के अमीर-गरीब सभी वर्गों के लोगों के लिए यह बाजार आज भी पहली पसंद बना हुआ है। हर मौसम में यहां चहल-पहल रहती है और त्योहारों व सहालग के दिनों में खपरैल बाजार की रौनक देखते ही बनती है।
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यहां हमें घर की हर जरूरत का सामान मिल जाता है, वो भी सही दाम में। इसलिए ज्यादातर खरीदारी यहीं से करती हूं।
- सुनीता भल्ला
कपड़ों और घरेलू सामान के लिए खपरैल बाजार सबसे भरोसेमंद जगह है, यहां विकल्प भी ज्यादा मिलते हैं। बड़ी बात यह कि सब कुछ मिल जाता है।
- नीना बरनवाल
सुनीता भल्ला- फोटो : संवाद
सुनीता भल्ला- फोटो : संवाद