लखीमपुर खीरी। डीएपी और एनपीके खाद के रेट 500 से 600 रुपये तक प्रति बोरी बढ़ने के कारण कुछ दुकानदारों और समितियों के कर्मचारी पुराने स्टॉक की खाद पर ओवररेटिंग करने की फिराक में हैं। इससे दुकानदारों ने किसानों को खाद स्टॉक में न होने की बात कहकर लौटाना शुरू कर दिया है। जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने पुराने स्टॉक की खाद को एमआरपी रेट पर ही बेचने के निर्देश दिए हैं। एमआरपी से अधिक मूल्य वसूलने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई करने की बात कही है।
खरीफ सीजन में धान समेत अन्य फसलों की बुआई का समय नजदीक आ रहा है, जिससे कुछ जागरूक किसानों ने अभी से खाद की व्यवस्था करनी शुरू कर दी है। करीब एक माह पहले डीएपी और एनपीके खाद के रेट में 500 से 600 रुपये प्रति बोरी तक वृद्धि हो चुकी है, जिससे 1200 रुपये वाली डीएपी नए मूल्य के हिसाब से 1700 से 1800 रुपये तक में मिलेगी। जिन व्यापारियों के पास अभी डीएपी और एनपीके खाद है, उन्होंने नए मूल्य के हिसाब से खाद बेचने की तैयारी कर ली है। जबकि नए मूल्य की खाद अभी नहीं आई है। ऐसे ही सहकारी समितियों के पास भी पुराने मूल्य की डीएपी और एनपीके खाद अभी स्टॉक में है। सूत्र बताते हैं कि 500 से 600 रुपये प्रति बोरी मूल्य बढ़ जाने से दुकानदारों और समितियों के सचिव इन खाद की बिक्री नए मूल्य के हिसाब से करना चाहते हैं। इसके लिए गुपचुप तरीके से स्टॉक को सगे-संबंधियों के नाम पर बिक्री दिखाकर खाद को कम किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि मार्च और अप्रैल माह में गन्ने को छोड़कर अन्य फसलों की बुआई नहीं होती है, जिससे डीएपी व एनपीके की ज्यादा बिक्री नहीं हुई है। इसलिए पुराने मूल्य की खाद को स्टाक में होना चाहिए।
पुराने मूल्य की डीएपी और एनपीके को एमआरपी पर ही बेचने के निर्देश दिए गए हैं। ओवररेटिंग करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस समय 3625 मीट्रिक टन डीएपी और 1979 मीट्रिक टन एनपीके की उपलब्धता है। किसानों से अपील है कि खाद खरीदते समय पॉस मशीन से पर्ची जरूर प्राप्त कर लें, जिस पर अंकित मूल्य से अधिक रुपये न दें। यदि एमआरपी से अधिक मूल्य पर कोई दुकानदार खाद बेचता है, तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराएं।
-सत्येंद्र प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी