गोला में कवियों को सम्मानित करते पदाधिकारी। संवाद
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गोला गोकर्णनाथ। स्थानीय समर्पण सेवा संस्थान की ओर से हुई कवि गोष्ठी में साहित्यकार एवं कवि अमर फतेहपुरी शास्त्री का शाल ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया।
संस्थान पर पंडित मुरलीधर त्रिपाठी अंजान की अध्यक्षता में हुई कवि गोष्ठी में अमर फतेहपुरी शास्त्री की लिखी कृति- विद्रोह के स्वर का विमोचन किया गया। वाणी वंदना के बाद कवि अमर फतेहपुरी शास्त्री ने पाकिस्तान को ललकारते हुए कहा-
सरहदों की ओर जो आंखें उठाकर देख ले,
उस कमीने दुष्ट की आंखें निकाल फोड़ दो।
मुख्य अतिथि डॉ रामलखन शर्मा ने कोरोना पर प्रहार किया-
ओ भइया कोरोना जाई हार।
हाथ जोड़कर दूर से कर लो नमस्कार।।
शशांक फतेहपुरी ने ओज भरते हुए कहा-
इस बार अगर रण होता है, तो पाकिस्तान नहीं होगा।
ढेरों में रुण्ड जमा होंगे, जीवित इंसान नहीं होगा।
कवि बृजलाल गौतम ने मन के उद्गार व्यक्त किए-
कर रहे हैं हम एक नए युग का सृजन,
भावना जीवित रहेगी, इस भव्यता को है नमन।
गोष्ठी में कन्हैया सिंह रास, ब्रजलाल गौल ने भी काव्य पाठ किया। संचालन मनोज ग्वाल ने किया।