बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भारत और नेपाल ने संयुक्त रणनीति तय की। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के मुस्तफाबाद में दोनों देशों के वनाधिकारियों की बैठक में रणनीति के तहत संयुक्त पेट्रोलिंग और वन अपराधों के प्रति अभियान चलाने का निर्णय किया गया।
बैठक में भारतीय वनाधिकारियों ने नेपाल सीमा के अंदर बड़ी संख्या में लगी आरा मशीनों का मुद्दा उठाया। एफडी पीटीआर राजामोहन ने कहा कि नेपाल सरकार आरा मशीनों को हटाने का प्रयास करे लेकिन नेपाली अधिकारियों ने देश की औद्योगिक नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा कर पाना संभव नहीं है।
निर्णय किया गया कि दोनों देश जंगल कटान, शिकार, वन्यजीव अंगों और जड़ी-बूटियों की तस्करी आदि रोकने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसके लिए समय-समय पर संयुक्त बैठक और पेट्रोलिंग करने के साथ ही वन अपराधियों से संबधित सूचनाओं का आदान-प्रदान करने का भी निर्णय किया गया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि दोनों देशों के डीएफओ और रेंज स्तर के अधिकारियों की संयुक्त बैठक क्रमश: तीन और एक महीने के अंतराल पर आयोजित की जाएगी। जिसमें इस अवधि की कार्रवाई और वन अपराधों की समीक्षा करने के साथ-साथ उस समय की परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में नेपाल की शुक्ला फाटा सेंक्चुरी के उपनिदेशक सलीना काडल, पीटीआर के एफडी राजामोहन, उप प्रभागीय वनाधिकारी दिलीप श्रीवास्तव सहित डीटीआर और नेपाल के सभी रेंज के अधिकारी शामिल हुए।
भारत-नेपाल सीमा पर होगी संयुक्त पेट्रोलिंग
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के प्रभागीय वनाधिकारी दिलीप श्रीवास्तव ने बताया कि भारत और नेपाल के वरिष्ठ वनाधिकारियों के बीच हुई संयुक्त बैठक में यह निर्णय किया गया कि बार्डर एरिया में वन अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए इंडो-नेपाल सीमा पर दोनों देशों के रेंज स्तर के अधिकारी संयुक्त पेट्रोलिंग करेंगे। इससे नेपाल के शुक्ला फाटा, लग्गा-भग्घा, वराही रेंज के साथ बम्हनपुर और टाटरगंज इलाके में संयुक्त पेट्रोलिंग के जरिए वन अपराधियों को चिह्नित करने में आसानी होगी।