लखीमपुर खीरी। जंगल में शाकाहारी वन्यजीवों के भोजन के रूप में नरम घास उगाने के लिए वन विभाग ग्रास लैंड मैनेजमेंट कराएगा। इसके तहत दुधवा नेशनल पार्क, बफर जोन और कतर्निया घाट में 2450 हेक्टेअर क्षेत्रफल में झाड़ियां और खरपतवार काटी जाएगी, ताकि उस जगह पर आसानी से घास उग आए और शाकाहारी वन्यजीव जंगल से बाहर न निकलें। कटाई के काम पर करीब एक करोड़ 22 लाख 50 हजार रुपये खर्च होंगे।
दुधवा नेशनल पार्क क्षेत्र में 1400 हेक्टेयर, बफर जोन में 50 हेक्टेयर और कतर्निया घाट में एक हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में उगी लंबी झाड़ियों को काटकर घास के मैदान में तब्दील करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ग्रास लैंड मैनेजमेंट का काम साल में दो बार कराना होता है। बारिश का सीजन निकल चुका है, इसलिए अब यह काम शुरू हो जाएगा। दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शाकाहारी वन्य जीव की गणना का परिणाम इसी वर्ष जून 2019 में आया था, जिसमें शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या बढ़ने की पुष्टि फील्ड डायरेक्टर ने की थी। पिछले तीन वर्ष पूर्व की गणना की तुलना में इस बार (2019) हाथी, भालू, गैंडा, बारासिंघा, सांभर, चीतल, पाढ़ा और सुअर आदि शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या बढ़ी है। यह परिणाम विभाग के लिहाज से काफी अच्छे रहे, लेकिन इनके भोजन की व्यवस्था के संसाधन भी जुटाने होंगे। इसलिए वन विभाग ने दुधवा नेशनल पार्क क्षेत्र में ग्रास लैंड मैनेजमेंट के लिए 70 लाख रुपये बजट उपलब्ध करा दिया है। जबकि बफर जोन में 2.50 लाख और कतर्निया घाट में 50 लाख रुपये बजट दिया गया है।
जीवन शृंखला के लिए भी घास का इंतजाम जरूर
जंगल में ही घास का इंतजाम करने के पीछे वजह यह भी है कि ऐसा होने पर शाकाहारी वन्यजीव भोजन के लिए जंगल से बाहर नहीं जाएंगे। जंगल की खाद्य शृंखला में शाकाहारी वन्य जीवों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि इनकी संख्या घटी तो मांसाहारी वन्यजीव भोजन की तलाश में बाहर नजदीकी गांवों की ओर निकल सकते हैं।
शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या
दुधवा पार्क, बफर जोन और कतर्निया घाट में फिशिंग कैट 179, काला हिरन दो, पाढ़ा 3344, वनरोज 5515, सांभर 316, चीतल 21199, बारासिंघा 2538, कांकड़ 1270, भालू 141, सुअर 14413, बंदर 23754, लंगूर 12560, गैंडा 46, मोर 3575, वन गाय 3152, जंगली बिल्ली 469, लोमड़ी 236, सियार 2849, सेही 669 हैं।
जंगल में ग्रास लैंड मैनेजमेंट कराया जाएगा, जिसके लिए शासन से बजट प्राप्त हुआ है। झाड़ियों के कटने के बाद कोमल घास निकलेगी, जो शाकाहारी वन्य जीवों के लिए मुफीद आहार बनेगी। -डॉ अनिल कुमार पटेल, डीडी बफर जोन/दुधवा नेशनल पार्क