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झुंड से बिखरे हाथी इकट्ठा होने के बाद फिर बढ़े नेपाल के रास्ते

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बांकेगंज। किशनपुर सेंक्चुरी के सुल्तानपुर जंगलों में पहुंचने वाले नेपाल के उत्पाती हाथियों के झुंड से बिछुड़े आठ हाथी बुधवार शाम अपने साथियों के पास पहुंच गए। इसके बाद फिर दो झुंड बनाकर नेपाल के रास्ते पर वे चल दिए। इनमें से एक झुंड पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगलों में जा पहुंचा, जबकि दूसरा झुंड बफरजोन की भीरा रेंज के महराजनगर जंगल कॉरीडोर होते हुए सुमेरनगर की तरफ बढ़ा है। इससे अफसरों का अनुमान है कि अब ये हाथी इन्हीं रास्तों से नेपाल रवाना हो जाएंगे।
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दुधवा टाइगर रिजर्व की मड़हा और जटपुरा बीट से तीन दिन पहले किशनपुर सेंक्चुरी की सुल्तानपुर बीट में पहुंचने से पहले रास्ते में इनके आठ साथी बिछुड़ गए थे। साथियों के इंतजार में 22 हाथी तीन दिन से सुल्तानपुर जंगल में डेरा डाले थे। इस बीच बुधवार शाम रास्ता भटके आठ हाथियों का झुंड फिर आकर अपने साथियों से मिल गया। इनके मिलते ही फिर उत्पाती हाथी दो झुंडों में बंट गए। इनमें एक झुंड पीलीभीत के हरीपुर रेंज की ओर पहुंच गया। दूसरा बड़ा झुंड सुल्तानपुर जंगल से रात नौ बजे चलकर बफरजोन की भीरा रेंज के महराजनगर कॉरीडोर होते हुए सुमेरनगर की ओर बढ़ता देखा गया। दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल के मुताबिक कि ये हाथी अपने कॉरीडोर की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसेे में नेपाल लौटने की संभावना ज्यादा है। साथ ही दोनों झुंडों के मिलते ही वे दुधवा या पीलीभीत के जंगल में दूसरी जगहों पर भी जा सकते हैं। जहां कुछ दिन प्रवास के बाद वे नेपाल वापसी करें।
हाथियों के पीलीभीत और सुमेरनगर की ओर रुख करते ही वन विभाग सतर्क हो गया है। पीलीभीत की हरीपुर रेंज पहुंचने की संभावना के मद्देनजर पीलीभीत टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन और दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनिल कुमार पटेल इनकी गतिविधियों पर नजर रखकर मिजाज भांपने की कोशिश में पूरी रात हाथियों को ट्रैक करते रहे। पश्चिम बंगाल से आए एलीफेंट मैनेजमेंट टीम के 24 एक्सपर्ट ट्रैकर्स और वन कर्मी इन अफसरों के साथ ट्रैक कर रहे हैं।
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खैर हुई मड़हा और जटपुरा में 19 दिन बस फसल ही बरबाद की
पीलीभ्रीत की हरीपुर रेंज से बफरजोन भीरा रेंज के महराजनगर जंगल कॉरीडोर से होकर नौ अक्तूबर को उत्पाती हाथी किशनपुर सेंक्चुरी की मड़हा और डीटीआर बफरजोन के जटपुरा बीट में पहुंचे थे। करीब 19 दिन यहां रहने के दौरान इन हाथियों ने शाम ढलने के बाद जंगल के आसपास बसे गांव के पास खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाया। ग्रामीण यह खैर मना रहे हैं कि इन हाथियों ने फसलों को ही नुकसान पहुंचाया, जनहानि नहीं की। वहीं करीब चार माह पहले नेपाल आए दो हाथी पीलीभीत से होते हुए बरेली और रामपुर तक पहुंच गए थे। वहां छह लोगों को मार डाला था।
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