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नेपाल के उत्पाती जंगली हाथियों का दल तीन हिस्सों में बंटा , दहशत

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बांकेगंज। नेपाल के शुक्ला फाटा नेशनल पार्क से आए हाथियों के झुंड अब तीन हिस्सों में बंट गए हैं। फसलों को नुकसान पहुंचा रहे इन हाथियों के इस तरह झुंडों में बंटने से वन विभाग को इन पर काबू पाना और ज्यादा दिक्कत भरा हो गया है। उनकी निगरानी करने में ही विभाग के ज्यादा कर्मचारियों को लगाना पड़ रहा है।
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पांच दिनों से दुधवा और बफरजोन के जंगलों में पहुंचे हाथियों का झुंड जंगल के बाहरी किनारों से ही होकर आबादी की तरफ बढ़ रहा था। इस झुंड में 30 से ज्यादा हाथी थे। अब ये हाथी तीन झुंडों में बंट गए हैं। सबसे छोटा झुंड पांच हाथियों का है जो दक्षिण खीरी वन प्रभाग की सहजनिया बीट में पहुंच गया। जबकि दूसरा अभी दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के खरेहटा और तीसरा झुंड जटपुरा बीट जंगल में ही डेरा डाले है। सबसे बड़े 18 जंगली हाथियों के झुंड ने पहले ही किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी रेंज (वन्यजीव विहार) रेंज के रेशम फाटा जंगल में जाकर डेरा डाल दिया था। ये हाथी जिधर से भी गुजर रहे हैं, रास्ते में पड़ने वाले खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसलों को रौंद कर नष्ट कर रहे हैं। रविवार को डीटीआर बफरजोन के डीडी डॉ. अनिल कुमार पटेल ने सहजनिया बीट से सटे गंगापुर गांव पहुंचकर हाथियों की लोकेशन जानी और ग्रामीणों से मिलकर उनके स्वभाव की जानकारी दी। डीएफओ साउथ समीर कुमार, डीएफओ शाहजहांपुर आदि अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। वहीं वन कर्मियों ने हाथियों को भगाने के लिए ड्रमों में आग जलाकर मिर्च सुलगाई, ताकि हाथी भाग जाएं। अफसरों ने ग्रामीणों से भी कहा कि वे जंगली हाथियों से फसल नुकसान रोकने के लिए मिर्च या कूड़े-करकट का धुआं करें।
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