सिंगाही (लखीमपुर खीरी)। गांव सिन्हौंना में धान के खेत की रखवाली के लिए गए राहुल पाल (21) को मगरमच्छ ने निवाला बना लिया। दूसरे दिन मंगलवार को तलाश करते वक्त उसका शव जौरहा नदी के किनारे मिला। चार मगरमच्छ उसे खा रहे थे। किसी तरह अधखाया शव मगरमच्छों से छुड़ाया गया। घटना के बाद से मगरमच्छों की वजह से लोगों में दशहत है।
राहुल के पिता कजरू उर्फ बालकिशन के पिता ने बताया कि आवारा पशुओं से धान की फसल बचाने के लिए बेटा सोमवार सुबह खेत गया था। दिन भर जब वह घर नहीं लौटा तो परिवार वाले शाम को उसे खोजने निकले। नदी किनारे राहुल की चप्पल और पैरों के निशान दिखे। इससे परिवार वालों को शक हुआ कि वह नदी किनारे शौच को आया होगा जहां मगरमच्छ का शिकार बन गया होगा। परिवार वाले गांव के ही गोताखोर के साथ राहुल को नदी में तलाशने में जुट गए। रात हो जाने के कारण गोताखोर लौट आए।
मंगलवार सुबह से ही गोताखोर ने फिर उसकी तलाश की । शाम को घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर दक्षिण तरफ मुर्तिहा गांव के पास नदी किनारे चार मगरमच्छ राहुल के शव को नोचकर खाते दिखे। गोताखोरों ने शोर मचाकर मगरमच्छों को भगाया। उसके बाद शव को नदी के बाहर लाया गया। ग्राम प्रधान ने घटना की सूचना पुलिस को दी।
बेटे के शव को नोचता देख पिता हुआ बदहवास
निघासन। गायब बेटे की तलाश में गोताखोरों के साथ परिवार के लोग भी जुटे थे। पिता बेटेे के शव को नोचकर खा रहे मगरमच्छों को देखकर बदहवास हो गया। वह नदी में ही खड़ा चीखता-चिल्लाता रहा। गोताखोरों ने किसी तरह से उसे संभाला और नदी के बाहर लाए।
कजरू के बेटे राहुल को जब गोताखोर शत्रोहन, रामकुमार, जगमोहन आदि नदी में ढूंढ रहे थे। उस समय बेटे की कजरू भी नदी में बेटे की तलाश कर रहा था। वह गोताखोरों के साथ ही मुर्तिहा गांव के निकट नदी में तलाश करते हुए पहुंचा तो उसकी नजर अपने बेटे के शव पर पड़ी। उसके शव को चारों तरफ से चार मगरमच्छ नोचकर खा रहे थे। बेटे के शव को मरमच्छ से घिरा देखकर कजरू बदहवाश हो गया। वह नदी के पानी में ही दहाड़े मारकर रोने लगा। उसके करूण रूदन को सुनकर अन्य गोतोखोर भी आ गए। जोरों से शोर मचाते हुए मगरमच्छ को भगाने का प्रयास करने लगे। शोर सुनकर आसपास काम कर रहे लोग भी वहां आ गए। शोरशराबा होने पर मगरमच्छ शव छोड़कर पानी में चले गए। किसी तरह से कजरू को भी गोताखोर नदी के बाहर लेकर आए। जब राहुल के शव को नदी से बहार निकाला गया तो उसका सिर, पैर और हाथ गायब था। पेट पर भी कई जगह मांस काटने के निशान बने थे। कजरू की पत्नी गंगाजली, उनके छोटे बेटे कपिल और शिवम का रो-रोकर बुरा हाल था।
मगरमच्छों का जोन बनी जौरहा नदी
जौरहा नदी मगरमच्छों का जोन बन गया है। वहां पर इसके पहले भी इसी गांव के शिवचरन के बेटे सुरेश को दो साल पहले महोली घाट पर अपना निवाला बनाया था। इसके अलावा नदी किनारे भैंस चराने गए दीपक बाबा को भी मगरमच्छों ने अपना निवाला बना डाला था। एक साल पहले कंधई यादव का पुत्र नीरज भी मगरमच्छ का शिकार हुआ था। इसके अलावा सरयू नदी किनारे भैंस चराने गए ऊधौनगर निवासी प्यारा सिंह के दो बेटों जगतार और सूरज सिंह भी मगरमच्छ के शिकार हो चुके हैं।