ऐतिहासिक चैती मेले के दूसरे दिन सांस्कृतिक मंच पर श्री रामायण गोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि बैजनाथ अग्निहोत्री, विशिष्ट अतिथि जगदीश प्रसाद दीक्षित और नगर पालिका की अध्यक्ष ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कथा व्यास पं मयंक शेखर पांडे ने शिव महिमा का बखान करते हुए कहा कि भगवान की कथा जीव की व्यथा मिटाती है। रामकेवट के प्रसंग में कहा कि श्रीराम के वन गमन के समय जब वह सरयू तट पर पहुंचे तो केवट ने श्रीराम के चरण धोकर नाव से पार उतारा। नदी पार करने के बाद जब भगवान उतराई देने लगे तो केवट हाथ जोड़कर विनती करने लगे और कहा कि जब वह उनके लोक को आए तो भवसागर पार करा देना। कथा में शिव-भस्मासुर, श्रीराम जन्म, जयंत आदि के प्रसंग सुनाए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। संचालन मनोज सक्सेना एडवोकेट ने किया। इस मौके पर द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, पंकज गुप्त, इमरान मलिक, कफील, रफी अहमद, जमाल अहमद राईन, मूलचंद, नदीम खां, आनंद सोनी, अरविंद पांडे, नरेंद्र्र शुक्ल, काशी विश्वनाथ तिवारी, रमेश सक्सेना, राजेश वाजपेयी, जेई राकेश कुमार, निरेंद्र कुमार धाकड़े, ओपी गुप्त आदि मौजूद रहे।
दुकानें हैं आकर्षण का केंद्र
गोला गोकर्णनाथ। ऐतिहासिक चैती मेले में तीन पीढ़ियों से आने वाली हैंडलूम की दुकान के मालिक हरियाणा के पानीपत निवासी दीपक जुनेजा ने बताया कि चार दशक पूर्व उनके दादा संतलाल जुनेजा फिर उनके पिता जगदीशलाल जुनेजा और अब वह मेले में दो हैंडलूम की दुकानें लगाते हैं। उनको मेले की सफाई, सुरक्षा और नगर पालिका द्वारा दिए जाने वाले सहयोग, पौराणिक शिवनगरी की संस्कृति बहुत पसंद है।