लखीमपुर खीरी। जाति-धर्म के नाम पर लड़े गए लोकसभा चुनाव में महंगाई, बेरोजगारी और विकास की बात ने गठबंधन की आस पूरी कर दी। खीरी और धौरहरा सीट पर सपा ने जीत हासिल की। दोनों सीटों के चुनाव में स्थानीय मुद्दे भी हावी रहे। जाति-धर्म का दांव कारगर साबित नहीं हुआ।
खीरी-धौरहरा लोकसभा सीट का परिणाम काफी चौंकाने वाला रहा। सर्वे एजेंसियों और राजनीतिक विश्लेषकों के दावे गलत साबित हुए। जातीय समीकरण की गणना भी काम नहीं आई। चुनावी गुणा-भाग में मतदाताओं ने सारे समीकरण फेल कर दिए। चुनाव प्रचार के समय राजनीतिक मंचों से किया गया प्रमुख दलों के स्टार प्रचारकों के संबोधन में जाति-धर्म का मुद्दा हावी रहा, जबकि जनता ने इसे नकार दिया। यह मुद्दा कुछ प्रतिशत ही काम कर सका। महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दे ज्यादा कारगर साबित हुए। संवाद
प्रभावी रहा किसान और नौजवान का फैक्टर
लोकसभा चुनाव में किसान और नौजवान का फैक्टर ज्यादा प्रभावी रहा। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने शहर और कस्ता की चुनावी सभा से इन दोनों वर्गों को अपने पाले में करने का प्रयास किया था। बेरोजगारी की बात कर नौजवानों को अपने पक्ष में किया। किसानों की आय दोगुनी करने का जिक्र भी किया था। लड़खड़ाती स्वास्थ्य सेवाओं का भी जिक्र किया था।
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हार के कारणों में गिनी जा रही आपसी खींचतान
खीरी सीट पर भाजपा की हार की कारणों में आपसी कलह पर चर्चा तेज हो गई है। भाजपा नेताओं का बयान भी आना शुरू हो गया है। भाजपा की महिला नेता ने वायरल वीडियो में भी इस बात का जिक्र किया। पार्टी के नेताओं पर आरोप भी लगाया है। धौरहरा सीट पर भी इसी तरह की चर्चा तेज हो गई है।
लोकसभा चुनाव में हावी रहे यह मुद्दे
बेरोजगारी, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, परिवहन की बदहाल व्यवस्था, छुट्टा गोवंश, बाढ़ की समस्या, खराब सड़कें, किसानों की समस्याएं।