महेवागंज। फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा तटबंध के अंदर बसे गांव के लोग वर्षों से बाढ़ कटान का दंश झेल रहे हैं। कटान रोकने में सिंचाई विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं। सिंचाई विभाग का कहना है कि यहां काम कराने का शासनादेश नहीं है। इस स्थिति में अब सेना ने मोर्चा संभाला है। लखनऊ से आए पांच सदस्यीय दल में मंगलवार को प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया।
शारदा तटबंध के अंदर दर्जनों गांव बसे हैं। यहां हर साल शारदा नदी कहर बरपाती है। लोगों के घर, जमीन सब छिन जाता है। सिंचाई विभाग इसे डूब क्षेत्र मान रहा है। सिचाई खंड के ईई जयप्रकाश का कहना है कि कटान रोकने का कोई शासनादेश नहीं है। एरिया फ्लड प्लेयिंग जोन है। प्रकृति से छेड़छाड़ की गई, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। इसलिए काफी सोच समझकर रणनीति बनानी होगी।
उधर, बाढ़ कटान की विभीषिका को परखने के लिए शनिवार लखनऊ की राजपूताना रेजिमेंट के पांच सदस्यीय दल ने गूम, मिलपुरवा तटबंध और जंगल नं. दस का दौरा किया। इलाके की भौगोलिक स्थिति परखी। सदर तहसील के राजस्व अधिकारियों संग करीब आधे घंटे तक सेना की टीम मुआयना करती रही। सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद टीम शारदा बैराज और निघासन के लिए रवाना हो गई।
नायब तहसीलदार सदर अश्वनी कुमार ने बताया कि भविष्य में आपदा के समय प्रभावी कार्रवाई की जा सके, इसके लिए सेना की लखनऊ स्थित राजपूत रेजिमेंट के अधिकारियों के पांच सदस्यीय दल ने शारदा किनारे बसे गांवों का मुआयना किया है।
सिंचाई मंत्री भी कर सकते हैं दौरा
सोमवार को क्षेत्रीय विधायक मंजू त्यागी भी डीएम दफ्तर पहुंची और डीएम से कोई हल निकालने को कहा। विधायक ने कहा कि 47000 की आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है। डीएम ने शासन स्तर पर बात की है। विभागीय मंत्री तक मामला पहुंच गया है। बुधवार को कैबिनेट और सिंचाई मंत्री स्वतंत्र देव सिंह प्रभावित गांव का दौरा कर सकते है। उधर नदी के तेवर देख ग्रामीण हलकान है।
चार साल पहले तीन करोड़ 29 लाख की परियोजना पर हुआ काम
वर्ष 2018 में कटान रोकने के लिए तीन करोड़ 29 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई। ग्रामीण बताते हैं कि विभाग ने गूम गांव के सामने करीब दो सौ मीटर जिओ ट्यूब लगाया था। हालांकि विभाग के अनुसार, वर्ष 2010 से कटान बचाव परियोजना बंद है। हालांकि, विकास कार्य गांव में हुए। सड़क, पुल पुलिया, पंचायत भवन, स्कूल, ओवरहेड टैंक, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से गांव सुसज्जित है। इन पर अब शारदा नदी की नजर टेढ़ी है।
फूलबेहड़ मे शारदा नदी किनारे मौका मुआयना करते सेना के अफसर