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दिमागी बुखार की रोकथाम के उपाय बेअसर

Wed, 30 Sep 2015 07:39 PM IST
लखीमपुर खीरी।
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जिले में दिमागी बुखार से पीड़ितों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग भले ही रोकथाम के प्रयास करने के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो लेकिन इस पर अंकुश न लग पाना स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। जिले में दिमागी बुखार के पीड़ितों का आंकड़ा 93 तक पहुंच गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ये संख्या 75 तक ही मान रहा है।
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बरसात के साथ ही जिले में दिमागी बुखार का प्रकोप शुरू हुआ बरसात बीत गई लेकिन अब तक दिमागी बुखार का प्रकोप कम नहीं हुआ। इस बार जिले में दिमागी बुखार ने भयंकर रूप ले लिया है। जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिला अस्पताल में भर्ती होने वालों में 46 बच्चों में दिमागी बुखार के लक्षण मिले। इन बच्चों को एईएस की श्रेणी में रखा गया। इनकी जांच के नमूने लखनऊ भेजे गए। जांच में इनमें 23 में जापानी इंसेफ्लाइटिस की पुष्टि हुई। इसमें पांच बच्चों की मौत जेई से तथा तीन एईएस से हो गई। दिमागी बुखार से पीड़ित 18 बच्चों को लखनऊ रेफर किया गया।  कई ऐसे बच्चों की भी मौत हो गई जिन बच्चों की जांच ही नहीं हो पाई थी। इसके अलावा तमाम लोग जिला अस्पताल में नहीं आए सीधे अपने बच्चों को लखनऊ लेकर गए। लखनऊ से जो सूची जिला अस्पताल के पास आई उसमें एईएस पीड़ित 47 बच्चे हैं इनमें 23 में जेई की पुष्टि हुई है। इस तरह से यह संख्या 93 तक पहुंच गई है हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले से जो 18 बच्चे लखनऊ रेफर किए गए हैं वह भी लखनऊ की सूची में शामिल हैैं लेकिन यह जरूरी नही है कि जो बच्चे जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किए गए हों वे सभी मेडिकल कॉलेज ही गए हों कई बच्चे प्राइवेट अस्पतालों में भी गए होंगे। इस तरह यह आंकड़ा 93 से भी अधिक हो सकता है।
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हो रहे हैं रोकथाम के पूरे प्रयास
जिले में इस बार दिमागी बुखार का प्रकोप कुछ ज्यादा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि रोकथाम के प्रयास नहीं हुए जिन गांवों में दिमागी बुखार के रोगी मिले हैं वहां छिड़काव कराया गया है तथा सभी के रक्त के नमूने लिए गए हैं। सीमित संसाधनों में भी पीड़ितों का बेहतर उपचार किया जा रहा है।
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-डॉ.वीके साहू, सीएमओ खीरी
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