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डेढ़ माह में भी पूरी नहीं हो पाई जांच

Wed, 06 May 2015 08:06 PM IST
निघासन
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निघासन के बहुचर्चित बाढ़ राहत भुगतान घोटाले की जांच डेढ़ माह में भी पूरी नहीं हो पाई है। जांच अधिकारी एसडीएम ने माना है कि बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर तमाम किसानों की बाढ़ राहत राशि लेखपालों और दलालों ने हड़प ली। एसडीएम ने फर्जी खाता खुलवाकर पैसे हड़पने वाले लोगों के खिलाफ स्टेट बैंक को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देकर गेंद बैंक के पाले में डाल दी है। पुलिस की जांच अभी तक वादी और आरोपियों के बयान लेने के आगे नहीं बढ़ सकी है।
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वर्ष 2013-14 में बाढ़ से तबाह हुई फसलों के मुआवजे के रूप में अकेले लालपुर ग्राम पंचायत में करीब 1700 चेक बनी थीं। इनमें कुछ बियरर चेक थीं तो कुछ एकाउंटपेयी। 50 से अधिक किसानों की एकाउंटपेयी चेेकलेखपालों ने किसानों को न देकर उन्हें दलालों को सौंप दिया। इन दलालों ने फर्जी आईडी के जरिए उन किसानों के फर्जी खाते बैंक में खुलवाकर चेक कैश करा लिए। जो बियरर चेक कैश कराए गए उनका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं।
जब मामले का खुलासा हुआ तो एडीएम ने मामले की जांच एसडीएम निघासन को सौंप दी। एसडीएम पीके सिंह ने अपनी जांच केवल फर्जी खाता खोलकर चेक भुनाने वाले दलालों और लापरवाही पूर्वक फर्जी खाता खोलने वाली बैंकों पर केंद्रित रखी। दलालों के हाथ चेक बेचने वाले लेखपालों के खिलाफ अब तक एफआईआर तो दूर विभागीय कार्रवाई तक नहीं की गई है।
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फर्जी आईडी बनाने वाले लोगों पर शिकंजा नहीं
फर्जी पहचानपत्र बनाने वाले रैकेट पर भी अब तक कोई शिकंजा नहीं कसा गया है। एसडीएम ने माना कि फर्जी आईडी के जरिए बैंक में खाते खोलकर घोटाला किया गया है लेकिन यह फर्जी आईडी किसने बनाई इसका पता लगाने की कोशिश नहीं की गई। हाल ही में फर्जी निवास, आय और जाति प्रमाणपत्रों के जरिए अनुदेशकों की भर्ती का मामला सामने आने के बाद भी प्रशासन नहीं चेता है। निघासन में इसके पहले भी फर्जी आईडी बनाने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
बैंक की लापरवाही और साठगांठ भी उजागर
बाढ़ राहत घोटाले में बैंक की भूमिका भी संदिग्ध है। खाते खोलने के लिए लगाई गई आईडी की बैंक के शाखा प्रबंधक और कमचारियों ने जांच ही नहीं की। यदि बैंक प्रबंधक पहचानपत्रों की ठीक से जांच करते तो मामला आसानी से पकड़ में आ जाता लेकिन इसमें जानबूझ कर लापरवाही बरती गई।
एसडीएम, निघासन पीके सिंह ने बताया कि बाढ़ राहत घोटाले की जांच अभी जारी है। जांच में प्रथमदृष्टया लेखपालों को भी दोषी पाया गया है। दलालों के खिलाफ पुलिस में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। लेखपालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है जरूरत पड़ी तो उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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