लखीमपुर खीरी। जिले में धड़ल्ले से डग्गामार वाहन दौड़ाए जा रहे हैं। इन वाहनों से जहां अक्सर हादसे होते रहते हैं तो वहीं सरकार को भी राजस्व की भारी क्षति होती है। डग्गामार मैजिक, वैन, बसें अनफिट तो हैं, इनका बीमा भी नहीं है। बावजूद इसके जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे। लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ मार्ग पर 24 घंटे चलाए गए चेकिंग अभियान में 98 डग्गामार वाहन मिले हैं, जिनसे रोजाना लगभग पांच लाख रुपये की राजस्व क्षति हो रही है।
जिले में वैसे तो सभी मार्गों पर डग्गामार वाहन दिन-रात दौड़ते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ मार्ग पर फर्राटा भरते हैं। ऐसा हम नहीं, बल्कि सरकारी रिपोर्ट बता रही है। हरदोई के क्षेत्रीय प्रबंधक इंजीनियर रमेश कुमार ने परिवहन निगम के सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) लखनऊ को 24 घंटे की चेकिंग रिपोर्ट भेजी है, जिसमें 98 डग्गामार संचालित होने की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट में डग्गामार बस से लेकर सभी प्रकार के सवारी वाहन शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन डग्गामार वाहनों से रोजाना दो हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं, जिससे पांच लाख रुपये रोजाना राजस्व का नुकसान होता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 29 सितंबर को प्रमुख सचिव परिवहन की अध्यक्षता में क्षेत्रीय प्रबंधक एवं सम्भागीय परिवहन अधिकारी की संयुक्त वीडियो कांफ्रेंस में चेकिंग के निर्देश मिले थे, जिसके क्रम में राष्ट्रीयकृत मार्ग लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ मार्ग पर 24 घंटे का चेकिंग अभियान चलाया, जिसमें 98 डग्गामार संचालित मिले। सिर्फ लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ मार्ग पर रोजाना 98 वाहनों में दो हजार से अधिक सवारियों का आना-जाना है, जिससे पांच लाख रुपये का रोजाना राजस्व नुकसान हो रहा है।
260 दिन में 1975 चालान, 572 वाहन सीज किए
एआरटीओ शांति भूषण पांडेय ने बताया कि विभाग की ओर से लगातार और रोजाना कार्रवाई की जाती है। जनवरी से अब तक 1975 वाहनों के चालान किए जा चुके है, जबकि 572 सीज किए गए। सिर्फ सितंबर की कार्रवाई देखी जाए तो एक से 28 सितंबर तक 180 और 121 वाहन सीज किए गए। एआरटीओ शांति भूषण पांडेय ने बताया यह सभी कार्रवाई बिना फिटनेस में किए गए हैं, जिसमें स्थानीय वाहन के साथ अन्य जनपद के आने वाले वाहन भी शामिल हैं।
मैगलगंज में भी डग्गामार बसों का बोलबाला
मैगलगंज। डग्गामार वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। क्षमता से अधिक सवारियां ठूंसकर भरते कर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार के चलते आए दिन हादसे होना आम बात बन गई है, जबकि यातायात प्रवर्तन अधिकारी टोल टैक्स के पास और अन्य प्रमुख सड़कों पर वाहनों की चेकिंग करते हैं, फिर भी डग्गामार बसें बिना किसी रोक-टोक के गुजर जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही न केवल यात्रियों की जान को खतरे में डाल रही है, बल्कि यातायात व्यवस्था को भी अस्त-व्यस्त कर रही है। आरोप है कि कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित रहती है। एक ओर छोटे वाहन चालकों से सख्ती की जाती है, लेकिन बसें खुलेआम पुलिस व प्रशासन की नाक के नीचे दौड़ती रहती हैं।
घटना के बाद सड़कों पर दिखा सन्नाटा
महेवागंज। लखीमपुर से फूलबेहड़ मार्ग पर सुबह से लेकर देर शाम तक डग्गामार वाहन दौड़ते हैं, लेकिन सोमवार को सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिला। रविवार की घटना के बाद सख्ती होने से डग्गामार वाहन एक दम गायब नजर आए। संवाद