तहसील में हुए बाढ़ राहत घोटाले की जांच में परत दर परत उघड़ने के बाद भी दोषी पाए गए लेखपालों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। अलबत्ता इस मामले में अब तक चार दलाल जेल जा चुके हैं। चार माह गुजरने को हैं, उनकी जमानत नहीं हो पाई है। इधर, लालपुर ग्राम पंचायत के बाद बैलहा में भी फर्जी आईडी के आधार पर लाभार्थियों के फर्जी खाते खोल कर लाखों रुपये डकारने का मामला सामने आया है।
वर्ष 2013 में आई भीषण बाढ़ में तबाह हुई फसलों के मुआवजे के रूप में शासन से आई धनराशि के चेक लाभार्थियों में वितरित न कर लेखपालों ने दलालों को सौंप दिए थे। मामले की जांच एसडीएम निघासन को सौंपी गई थी। जांच शुरू हुए छह माह से अधिक समय हो गया है लेकिन जांच के परिणाम का अता पता नहीं है। इसी मामले में भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक द्वारा लिखाई गई रिपोर्ट पर पुलिस ने शुरुआती दौर की जांच में तेजी दिखाई लेकिन विवेचक वीर सिंह का तबादला होने के बाद जांच ठंडे बस्ते में चली गई। हालांकि इस मामले में अब तक चार लोग जेल जा चुके है। लेखपाल क्षत्रपाल और तत्कालीन तहसीलदार पर सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हो चुका है। जांच में दोषी पाए जाने और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपी लेखपालों की गिरफ्तारी तो दूर अब तक उनके खिलाफ प्रभावी विभागीय कार्रवाई भी नहीं हो सकी है। उधर बैलहा गांव के कुछ ग्रामीणों ने भी बाढ़ राहत के चेक फर्जी ढंग से भुनाए जाने की शिकायत तहसीलदार से की थी। इस पर तहसीलदार ने नायब तहसीलदार से जांच कराई तो शिकायत सही मिली। नायब तहसीलदार ने जांच रिपोर्ट तहसीलदार को सौंप दी है।
उधर जिला पंचायत सदस्य राजीव गुप्ता ने मामले की शिकायत प्रदेश के राजस्वमंत्री शिवपाल सिंह यादव से की तो उन्होंने घोटाले की जांच राजस्व परिषद की टीम से कराने के निर्देश दिए। जिला पंचायत सदस्य ने चेक वितरण का सत्यापन कराए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चेक वितरण का सत्यापन कराए जाने से घोटाले की सारी पर्तें खुलकर सामने आ जाएंगी। किसान मजदूर संगठन और व्यापार मंडल समेत कई संगठनों ने घोटालेबाज लेखपालों की गिरफ्तारी की मांग की है।
एसडीएम निघासन पीके सिंह ने बताया कि आरापी तहसीलदार रिटायर हो चुके हैं और लेखपाल को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। मामला कोर्ट में है कोर्ट जो आदेश करेगी उसके अनुसार कार्रवाई होगी।