बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के गैंडों के अब आधार कार्ड की तर्ज पर डिजिटल पहचान-पत्र बनाए जाएंगे। उन पर उनकी फोटो के साथ-साथ शरीर के चिह्न अंकित किए जाएंगे।
दुधवा नेशनल पार्क के दक्षिण सोनारीपुर और बेलरायां रेंज में सौर उर्जा चालित बाड़ में चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना फेज एक व दो में स्वछंद विचरण करने वाले गैंडाें की डीएनए प्रोफाइल बनाने की कवायद कई वर्षों से चल रही है।
एक नया अध्याय जोड़ते हुए गैंडों को यूनिक पहचान देने के लिए आधार कार्ड के तर्ज पर डिजिटल पहचान पत्र बनाने की मुहिम शुरू की गई है। इसके लिए विश्व प्रकृति निधि और वन कर्मियों के सहयोग से गैंडों की पहचान करने और और फोटो लेने का काम शुरू हो चुका है। जिन गैंडों का अभी तक नामकरण नहीं हुआ है, उनका नामकरण करके सभी का अलग-अलग पहचान पत्र बनाया जाएगा। इसमें गैंडों की फोटो लगाने के साथ-साथ उनकी पहचान के निशान अंकित होंगे।
खास बात यह है कि गैंडों के पैर, सींग, पूंछ, आंख समेत शरीर के अन्य अंगों की पहचान भी अंकित की जाएगी। यही नहीं, उनकी डिजिटल प्रोफाइल भी पहचान पत्र में दर्ज की जाएगी। यदि कोई गैंडा किसी दूसरी जगह से आ जाता है तो इस प्रणाली से उसकी पहचान करने में आसानी होगी।
दुधवा में हैं कुल 51 गैंडे
दुधवा पार्क के गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में मौजूदा समय में कुल 51 गैंडे स्वछंद विचरण कर रहे हैं। इसमें दक्षिण सोनरीपुर रेंज में कुल 46 गैंडे हैं। इनमें 5 गैंडे स्वछंद विचरण के लिए बाड़ से बाहर जंगल क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं, जिससे बाड़ के अंदर संख्या 41 रह गई है। वहीं, बेलरायां रेंज के छंगा नाला क्षेत्र में बाड़ के अंदर छह गैंडे विचरण करते हैं। इनमें हाल ही आपसी संघर्ष के दौरान एक नर गैंडा हिमांशु की हुई मौत के बाद बाड़ के अंदर संख्या घटकर पांच रह गई है। मौजूदा समय में दोनों बाड़ के अंदर इनकी संख्या कुल 51 है। संवाद
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दुधवा के गैंडों के आधार कार्ड की तर्ज पर डिजिटल पहचान पत्र बनाए जा रहे हैं, ताकि उनकी पहचान की जा सके। इससे उनके रखरखाव में आसानी होगी।
- डॉ एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व