लखीमपुर। आईएएस महेंद्र बहादुर सिंह को 29 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी का डीएम बनाया गया था। उन्होंने दो साल सात माह 26 दिन उन्होंने अपनी पारी बतौर डीएम खेली।
निर्विवाद पारी खेलते हुए महेंद्र बहादुर सिंह का कार्यकाल सामान्य रहा। विधानसभा और लोकसभा चुनाव को उन्होंने शांतिपूर्वक संपन्न कराया, लेकिन उनके कार्यकाल की जिले में कोई खास उपलब्धि नहीं देखी गई, जिससे लखीमपुर खीरी के लोग कह सकें कि आईएएस महेंद्र बहादुर सिंह ने जिले को बड़ी सौगात दिलाई। लखीमपुर में जिला मुख्यालय होने के बावजूद रोडवेज को वर्कशॉप नहीं मिल सका। उनके तबादले के बाद राजनीतिक दलों में चर्चा शुरू हो गई है कि महेंद्र बहादुर सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष को भी साधे रहे।
भ्रष्टाचार और अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई में चर्चा में रहीं आईएएस दुर्गा शक्ति
लखीमपुर। 2010 बैच की आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को लखीमपुर खीरी का नया डीएम बनाया गया है। वह गौतमबुद्ध नगर की संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात रहने के दौरान भ्रष्टाचार और अवैध रेत खनन के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाने के बाद सार्वजनिक रूप से चर्चा में सामने आईं थीं। बतौर डीएम उनकी पहली तैनाती बांदा में रहीं। अब वह लखीमपुर की कमान संभालेंगी।
वह आईएएस अभिषेक सिंह की पत्नी हैं। दुर्गा नागपाल मूलरूप से आगरा की रहने वाली हैं। उनके पिता एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं, जिन्हें दिल्ली छावनी बोर्ड में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया था। उनके दादा भी पुलिस अधिकारी थे। दुर्गा शक्ति दुर्गापाल ने 2007 में इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। 2009 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय रैंक 20 प्राप्त की, जिसके बाद वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में शामिल हो गईं।
डीएम महेंद्र बहादुर सिंह