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संविधान निर्माण में भी रहा खीरी का विशेष योगदान

Sun, 24 Jan 2016 04:58 PM IST
लखीमपुर खीरी।
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में खीरी जिले की अग्रणी भूमिका रही है। यहीं नहीं आजादी के बाद संविधान निर्माण में भी जिले का विशेष योगदान रहा। यहां के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बंशीधर मिश्र संविधान सभा के सदस्य रहे। उन्होंने संविधान बनते समय कई महत्वपूर्ण सुझाव देकर उन्हें संविधान में शामिल कराया। आजादी के बाद वह चार बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य और एक बार वनमंत्री भी रहे।
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शाहजहांपुर जिले के पुवायां कस्बे में जन्मे पं. बंशीधर मिश्र की जन्मभूमि भले ही पुवायां रही हो लेकिन उनकी कर्मभूमि खीरी जिला ही रही है। 1926 में लखीमपुर आते ही उन्होंने जिले में स्वतंत्रता संग्राम की कमान संभाल ली। उन्होंने यहां आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संपर्क साधा और उन्हें आंदोलन के साथ जोड़ने का प्रयास किया। तब से आजादी मिलने तक वह लगातार संघर्षशील रहे। स्वतंत्रता संग्राम में वे कई बार जेल गए। यातनाएं सहीं लेकिन उनके कदम न थके न रुके।
असहयोग आंदोलन के दौरान 1927 में डेढ़ साल की कैद और 100 रुपया जुर्माने की हुई। इसके बाद जंगल सत्याग्रह के दौरान वर्ष 1930 में छह माह की कैद और 20 रुपया जुर्माना की सजा सुनाई। 1931 में दफा 108 के तहत उन्हें जमानत करानी पड़ी। बाद में मुकदमा खत्म हो गया। सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान 1932-33 में एक वर्ष की कैद 200 रुपया जुर्माने की सजा हुई।
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स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनका जेल का सफर थमा नहीं। व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के दौरान 1941 में एक वर्ष की कैद और 20 रुपया जुर्माने की सजा सुनाई। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में गिरफ्तार हुए उन्हें 29 माह नजरबंद रहना पड़ा।
वर्ष 1928 में 28, 29, 30 सितंबर को विलोबी मेमोरियल हाल में पं. जवाहर लाल नेहरू के सभापतित्व में एक बड़ी राजनैतिक कांफ्रेंस हुई। इस कांफ्रेस को सफल बनाने में पं. बंशीधर मिश्र ने अपनी पूरी जान लगा दी।
इसके बाद 13 फरवरी 1929 में गणेश शंकर विद्यार्थी की अध्यक्षता में किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। उसकी सफलता में भी बंशीधर मिश्र का बड़ा योगदान रहा। अगले साल 12 नवंबर 1929 को महात्मा गांधी की सभा हुई।
इसमें गांधी जी को तीन हजार 146 रुपया पांच आना तीन पैसा की थैली भेंट की गई। इस धन संग्रह में भी बंशीधर मिश्र का बड़ा योगदान रहा।
आजादी के पहले 1937 में जब पहली बार विधानसभा गठित हुई तो वे विधानसभा सदस्य बने। इसके बाद 1946 में भी वह विधानसभा सदस्य रहे। आजादी के बाद 1962, 1967 और 1969 में विधायक चुने गए। 1969 में वह प्रदेश सरकार में वनमंत्री भी रहे।
आजादी के  बाद जब संविधान सभा गठित हुई तो बंशीधर मिश्र को संविधान सभा का सदस्य बनाया गया। संविधान बनने के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। उनके कई प्रस्तावों को भारतीय संविधान में जगह दी गई।
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